प्रदेश भर में स्थापित डिलीवरी सेंटरों में गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव रामभरोसे है। ग्रामीण महिलाओं की जान जोखिम में डालकर प्रसव करवाना पड़ रहा है। कारण यह है कि डिलीवरी सेंटरों में 24 घंटे लाइट की सुविधा नहीं है। इन सेंटरों में जेनरेटर न होने के कारण बत्ती गुल होने की सूरत में इमरजेंसी लाइट से प्रसव किए जाते हैं। इमरजेंसी लाइट के बीच में बंद होने पर महिलाओं की जान रामभरोसे रहती है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो पीएचसी और सीएचसी स्तर पर स्थापित डिलीवरी सेंटरों में अभी तक जेनरेटर की सुविधा मुहैया नहीं करवाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण महिलाओं की सुविधा को नजदीकी अस्पतालों में डिलीवरी सेंटर खोले हैं। प्रदेश में लेवन टू और थ्री स्तर के सैंकड़ों डिलीवरी सेंटरों में जेनरेटर नहीं हैं।
हर जिले में लेवल वन स्तर पर स्थापित डिलीवरी सेंटरों में ही जनरेटर सुविधा है। जहां सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट हैं, यह सुविधा वहां पर अस्पतालों में दी गई है। इनमें हर जिले के जिला स्तरीय अस्पताल या फिर मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।