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बेटियां बोलीं, अब हमें भी मिला उड़ने को खुला आसमान

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शिमला। एनडीए परीक्षा में बेटियों को भी शामिल किए जाने के फैसले का हर ओर स्वागत हो रहा है। फैसले के बाद बेटियों ने कहा कि अदालत ने उन्हें उड़ने के लिए खुला आकाश दे दिया है। अभिभावकों का भी मानना है कि अब सेना में भी बेटियां धाक जमा सकेंगी। फैसले से देश सहित राजधानी शिमला की बेटियां भी खुश हैं। बेटियों और अभिभावकों ने न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बेटियों का सेना में सीधे अधिकारी बनने का सपना इस फैसले से पूरा हो सकेगा।
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इस फैसले से जहां सेना में लिंग भेद समाप्त होगा। वहीं, बेटियां बराबरी कर आगे बढ़ेंगी। न्यायालय के इस फैसले को लेकर छात्राओं और उनके अभिभावकों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि फैसले से बेटियां भी सेना में पुरुषों की बराबरी कर सकेंगी और अफसर बनकर देश सेवा कर सकेंगी। छात्राएं भी अब अपने आप को इस परीक्षा में साबित कर सकेंगी।
नई ऊंचाइयां छूने का सपना होगा साकार : जपनीत
जमा दो की छात्र जपनीत कौर ने न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सेना में अफसर बनने का सपना अब पूरा हो सकेगा। फैसले से सेना में महिलाएं अब पुरुषों की बराबरी कर सकेंगी और अपने को साबित कर सकेंगी। अब मैं एनडीए की परीक्षा भी जरूर दूंगी। सेना में अफसर बनने के लिए सोचा था, मगर ऑप्शन नहीं था, अब विकल्प मिल गया है। मेरा सपना पूरा कर सकूंगी।
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अब सेना में जाने की तैयारी भी करुंगी: मनीषा
पहले सोचा था कि जमा दो के बाद बीटेक में प्रवेश लेकर इंजीनियर बनूंगी। अब सर्वोच्च न्यायालय ने बेटियों के लिए और राह भी खोल दी है। अब बीटेक के साथ एनडीए की परीक्षा के लिए भी तैयारी करूंगी। सोचती थी कि एनडीए की परीक्षा दूंगी। पता चला कि इसे सिर्फ लड़के दे पाएंगे। जो कभी सोचा भी नहीं था, वो हो गया। भविष्य बनाने का एक बेस्ट ऑप्शन मिल गया है। अब सेना में भी जा सकती हूं।
भविष्य बनाने का मिला बेहतर विकल्प: अनुपम
दयानंद स्कूल की प्रधानाचार्य और अभिभावक अनुपम ने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में अपने को साबित कर रही हैं। अब सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से एनडीए की परीक्षा देकर सेना में अफसर बनकर भी बेटियां अपने को साबित कर सकेंगी। पहले उनके लिए यहां कोई ऑप्शन ही नहीं थी। इससे वे महरूम थी। अब भविष्य बनाने के लिए बेटियों को विकल्प मिल गया है। यह सराहनीय फैसला है।
सेना में भी लोहा मनवाएंगी अब बेटियां: केडी शर्मा
अभिभावक केडी शर्मा ने कहा कि बेटियां किसी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। वे अब एनडीए परीक्षा में अपनी प्रतिभा, साहस और मेहनत के बूते प्रवेश पाकर आर्मी अफसर बन सकेंगी। यह क्षेत्र आज तक उनके लिए अछूता रहा था, मगर अब वे बराबरी के साथ आगे बढ़ पाएंगी। अपना और अपने माता पिता के सपनों को साकार कर सकेंगी। न्यायालय का यह फैसला बेटियों के लिए ऐतिहासिक है।
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