शहर के लिए अलग मोटर मार्केट बनाने की योजना नहीं चढ़ी सिरे, जान जोखिम में डालकर काम करते हैं मेकेनिक
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कच्ची घाटी और घोड़ा चौकी में चल रही दुकानें अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी शिमला के प्रवेशद्वार तारादेवी से लेकर घोड़ा चौकी और कच्ची घाटी क्षेत्र में रोज नेशनल हाईवे किनारे सैकड़ों मेकेनिक, डेंटर और पेंटर जान जोखिम में डालकर गाड़ियों की मरम्मत कर रोजी कमा रहे हैं।
मोटर रिपेयर से संबंधित स्पेयर पार्ट्स बेचने, गाड़ियों की मरम्मत और रंग-रोगन करने वाले कारोबारियों के लिए सुरक्षित माहौल में मोटर मार्केट बनाने का सपना साकार नहीं हुआ। क्षेत्र के करीब 48 कारोबारी और इनके साथ गाड़ियों की मरम्मत करने वाले 60 से 70 मैकेनिक तथा वर्कर असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं। इन्हें तिरपाल तक लगाने की अनुमति नहीं है। पुलिस सड़क के एक किनारे पर ही गाड़ी खड़ी करने की अनुमति देती है। गाड़ी गलत जगह खड़ी होने पर चालान हो जाता है। एनएच की सफेद लाइन से बाहर गाड़ी खड़ी कर मरम्मत की तो तेज रफ्तार से हाईवे पर चलने वाले वाहनों की चपेट में आने से गाड़ी और मैकेनिक हादसे का शिकार हो सकते हैं।
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पिछले 60 साल से यहां इसी तरह काम चल रहा है, लेकिन ट्रैफिक बढ़ने से जाम की समस्या आम होने लगी है। टुटू-तारादेवी बाईपास, फिर जाठिया देवी और अब शनान में अलग मोटर मार्केट बनाने की चर्चा चल रही है। योजनाएं आज तक जमीनी स्तर पर नहीं उतर पाई हैं। घोड़ा चौकी और कच्ची घाटी के कारोबारी तथा वर्कर बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
35 साल से खुले में कर रहा हूं काम कच्चीघाटी के इस मोड़ पर 35 साल से सड़क किनारे गाड़ियों की डेंटिंग-पेंटिंग का काम कर रहा हूं। गाड़ी सफेद लाइन से बाहर लग जाए तो चालान हो जाता है। वहीं, कब एनएच पर चलने वाली गाड़ी रिपेयर के लिए खड़ी गाड़ी से टकरा जाए, कोई पता नहीं। डर तो लगता है, मगर विकल्प कोई नहीं है। कोई और रास्ता भी नहीं है।
-सुरेंद्र कुमार, डेंटर-पेंटर, घोड़ा चौकी
सिर्फ एक गाड़ी खड़ी करने की है अनुमति गाड़ी को सड़क के एक किनारे पर ही मुश्किल से खड़ी कर रिपेयर करने की अनुमति है। दो गाड़ियां आ जाएं तो मुश्किल खड़ी हो जाती है। ऐसे में रिपेयर के लिए एक से ज्यादा गाड़ियां आने पर मना ही करना पड़ता है। खुले आसमान के नीचे बारिश और ठंड में काम करना मुश्किल होता है। बस, कहीं हमें भी छत मिल जाए तो काम बढ़े, हमें भी कुछ राहत मिले और हम खुद को सुरक्षित महसूस करें।
-जसवीर, मेकेनिक, घोड़ा चौकी
लगातार बारिश रहे तो हो जाता है संकट खुले में काम करने के अलावा कोई चारा नहीं है। 15 साल से यहीं काम कर रहा हूं। लगातार बारिश होने पर काम ठप हो जाता है और कमाई नहीं हो पाती। सालों से मार्केट यहीं चल रही है। नई जगह मार्केट शिफ्ट होने से काम चले या न चले, यह डर भी है। इसलिए सरकार-प्रशासन हमें सिर्फ यहां काम करने के लिए छत की सुविधा दे।
-राजू, मेकेनिक, कच्चीघाटी
अलग सुरक्षित मार्केट बनाने से हल होगी समस्या गाड़ियों की मरम्मत सड़क किनारे करना मजबूरी है। ज्यादा गाड़ियों को खड़ा करने की जगह नहीं होती। कई बार जाम भी लग जाता है, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। सरकार जल्द अलग जगह चिह्नित कर मार्केट बनाकर दें जिससे हम सुरक्षित महसूस कर काम कर सकें।
-इकरार मलिक, मेकेनिक
मोटर मार्केट बनाने योजना नहीं चढ़ी सिरे
सरकार की ओर से कई बार अलग मोटर मार्केट बनाकर पूरे शहर के मेकेनिकों और स्पेयर पार्ट्स की दुकानों को वहां शिफ्ट करने की योजनाएं बनाई गई हैं। इन्हें जमीन पर उतारकर मार्केट बनाई जाए। कच्चीघाटी, घोड़ा चौकी और तारादेवी से मेकेनिक, रिपेयर और स्पेयर पार्ट्स की दुकानों को एक जगह शिफ्ट किया जाए, जिससे कारोबार बढ़े और मेकेनिकों व मजदूरों को सुरक्षित माहौल मिले। सरकार इस मांग को पूरा करने की दिशा में जल्द कार्य शुरू करे।
मार्केट शिफ्ट करने पर जल्द लें फैसला मोटर मार्केट के लिए शनान में देखी गई जगह को विकसित कर जल्द सभी कारोबारियों को वहां शिफ्ट करने को लेकर फैसला लिया जाए जिससे हमारा कारोबार बढ़े और मेकेनिक, वर्कर और स्पेयर पार्ट्स की वर्कशॉप वहां सुरक्षित माहौल में चलाई जा सकें। प्रदेश सरकार और नगर निगम प्रशासन की मार्केट शिफ्ट करने को लेकर बैठकें भी हो चुकी हैं। पिछली सरकार के समय से चली आ रही इस मांग को मौजूदा सरकार जल्द पूरा करे।