धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि टुटू दूसरों की सेवा के लिए समर्पित थे। उन्होंने दुनिया को सिखाया कि कैसे हम दूसरों की मदद कर सकते हैं। डेसमंड टुटू के साथ मैंने एक स्थायी मित्रता का आनंद लिया। मुझे याद है कि हमने 2015 में धर्मशाला में सप्ताह भर कई मौकों पर एक साथ समय बिताया था।
धर्मगुरु दलाईलामा ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेसमंड टुटू के निधन पर गहरा दुख जताया है। टुटू की बेटी को लिखे खत में दलाईलामा ने कहा है कि हमने एक महान व्यक्ति को खो दिया है, जिन्होंने वास्तव में एक सार्थक जीवन जिया। धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि टुटू दूसरों की सेवा के लिए समर्पित थे। उन्होंने दुनिया को सिखाया कि कैसे हम दूसरों की मदद कर सकते हैं।
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डेसमंड टुटू के साथ मैंने एक स्थायी मित्रता का आनंद लिया। मुझे याद है कि हमने 2015 में धर्मशाला में सप्ताह भर कई मौकों पर एक साथ समय बिताया था। हमारे बीच दोस्ती और आध्यात्मिक बंधन था। टुटू अधिक से अधिक सामान्य भलाई के लिए अपने भाइयों और बहनों की सेवा करने के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। वह एक सच्चे मानवतावादी और मानवाधिकारों के प्रतिबद्ध अधिवक्ता थे।
नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले दक्षिण अफ्रीका के आर्चबिशप रह चुके डेसमंड टूुटू का रविवार को 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वर्ष 2015 में दक्षिण अफ्रीका के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेसमंड टुटू दलाईलामा से मिलने मैक्लोडगंज पहुंचे थे। तब धर्मशाला में दलाईलामा के साथ करीब एक हफ्ते तक रहे थे। इसी दौरान दलाईलामा और डेसमंड टुटू ने ‘द बुक ऑफ जॉय’ नामक किताब लिखी थी।