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CSR Techniques: स्पेक्ट्रम की बढ़ेगी क्षमता, देश के दुर्गम क्षेत्रों में दौड़ेगी 5जी और 6जी इंटरनेट सेवा, आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने बनाई चिप

Thu, 02 Jun 2022 01:34 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने आधुनिक भारत में इंटरनेट सेवा को विदेशों के मुकाबले तीव्र बनाने के लिए आधुनिक कोआपरेटिव स्पेक्ट्रम सेंसर चिप (सीएसआर) की तकनीक ईजाद की है। 
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आधुनिक कोआपरेटिव स्पेक्ट्रम सेंसर चिप - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आधुनिक भारत में अब दूरसंचार सेवाओं में स्पेक्ट्रम की कमी नहीं होगी। दूरदराज के दुर्गम क्षेत्रों में तीव्र गति से 5 जी और 6जी की इंटरनेट सेवा दौड़ेगी। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने आधुनिक भारत में इंटरनेट सेवा को विदेशों के मुकाबले तीव्र बनाने के लिए आधुनिक कोआपरेटिव स्पेक्ट्रम सेंसर चिप (सीएसआर) की तकनीक ईजाद की है। यह तकनीक वायरलेस संचार के भावी उपयोगों में डेटा संचार की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम के दोबारा उपयोग की क्षमता बढ़ाएगा।

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इसकी जानकारी देते हुए आईआईटी के निदेशक लक्ष्मीधर बैहरा ने दावा है कि इससे स्पेक्ट्रम की समस्या का निवारण होगा और दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के लिए अत्याधुनिक समाधान देश में इंटरनेट क्रांति लाएगा। इंटरनेट की 5जी और 6जी सेवाओं का विस्तार उन जगहों पर होगा, जहां कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस शोध कार्य के निष्कर्ष हाल ही में आईईईई ट्रांजेक्शन ऑन कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईईईई ट्रांजेक्शन ऑन सर्किट्स एंड सिस्टम्स-। में प्रकाशित किए गए हैं। 

स्पेक्ट्रम के अनुकूल उपयोग के सबसे अच्छे तरीके खोजा: श्रेष्ठ
शोध पत्र के लेखक कंप्यूटिंग एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्कूल के सहायक प्रो. डॉ. राहुल श्रेष्ठ बताते हैं कि सरकार सहित पूरी दुनिया की कई सरकारों ने सुनिश्चित स्पेक्ट्रम आवंटन की नीति अपनाई है। जिसके मद्देनजर उपलब्ध स्पेक्ट्रम का बुद्धिमानी से उपयोग करना जरूरी है। स्पेक्ट्रम के अनुकूल उपयोग के सबसे अच्छे तरीकों में एक की इजाद आईआईटी मंडी ने कर ली है। 
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5जी और 6जी में होगा लाभ: चौरसिया
शोधपत्र के  सह लेखक पीएचडी शोधकर्ता रोहित बी चौरसिया आईआईटी मंडी द्वारा विकसित चिप दूर संचार सेवाओं में क्रांतिकारी कदम है। स्पेक्ट्रम जो उपयोग में नहीं होगा वह प्राप्त करने के लिए सीएसआर चिप का उपयोग किसी भी मोबाइल वायरलेस संचार उपकरण से किया जा सकता है। इसका खास कर आने वाले समय में 5जी और 6जी वायरलेस संचार प्रौद्योगिकियों में स्पेक्ट्रम की क्षमता बढ़ाने में बहुत लाभ होगा।

जानें क्या है स्पेक्ट्रम
जब हम स्पेक्ट्रम की बात करते हैं तो साधारण भाषा में इसका मतलब टेलीकॉम सेक्टर के लिए रेडियो वेव तरंगों से ही होता है। यह उस विकिरण ऊर्जा का नाम है जो धरती को चारों ओर से घेरे रहती है। इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन  का मुख्य स्रोत सूर्य है। यह ऊर्जा धरती के नीचे दबे रेडियोएक्टिव तत्वों के साथ ही तारों और आकाशगंगाओं से भी मिलती है। इसी ऊर्जा के माध्यम से हम टीवी रेडियो और मोबाइल फोन चला पाते हैं। स्पेक्ट्रम का कारोबारी इस्तेमाल सरकार तय करती है और उसकी नीलामी करती है। जिसमें यह तय  होता है कि तरंग की लंबाई कितनी है? उसकी फ्रीक्वेंसी कितनी है?  कितनी ऊर्जा कितनी दूर तक ले जा सकती है? सबसे लंबी तरंगे रेडियो वेव स्पेक्ट्रम की होती है और इन्हीं का उपयोग टेलीकॉम सेक्टर में किया जाता है।
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शोध पत्र के लेखक  सहायक प्रो. डॉ. राहुल श्रेष्ठ व  सह लेखक पीएचडी शोधकर्ता रोहित बी चौरसिया

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