स्वरा माउंटेन आर्ट फेस्टिवल के आखिरी दिनदेश की मशहूर भरतनाट्यम नर्तकी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई ने अपनी नृत्य कला से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 12वीं सदी के देवी-शिव नृत्य की प्रस्तुति से मल्लिका ने प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक के महिला के प्रेम भाव को नृत्य के माध्यम से दर्शाया।
उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इसी यादगार शाम के साथ पांच दिवसीय फेस्टिवल का भी समापन हो गया। जागोरी संस्था और वन बिलियन राइजिंग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन मैक्लोडगंज के पास धर्मकोट में तिब्बतियन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (टिप्पा) में किया गया। अमर उजाला इस कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर रहा। निर्वासित तिब्बत संसद की उपाध्यक्ष डोलमा गैरी ने इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
कार्यक्रम में चर्चित गायिका और कंपोजर त्रिथा सिन्हा ने भी महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद मंच पर पहुंचीं सुमिशा शंकर ने लोगों को मेडिटेशन की क्रिया सिखाई और नृत्य भी किया। समापन समारोह में जागोरी संस्था की संस्थापक आभा भैया ने मल्लिका साराभाई, त्रिथा सिन्हा, सुमिशा शंकर और यूनुस खिमानी को सम्मानित किया।
बीते 28 मई से 1 जून तक चले इस फेस्टिवल में रचनात्मक कलाकृतियों, शास्त्रीय संगीत की बारीकियों और योग के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, देश और विदेश से आए प्रतिभागियों ने भी इस फेस्टिवल में हिस्सा लिया। इस दौरान नगर निगम धर्मशाला के महापौर ओंकार नैहरिया, जागोरी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
रस तभी बनता है, जब कलाकार की आत्मा लोगों को छू जाए : साराभाई
प्रसिद्ध भरतनाट्यम नर्तकी मल्लिका साराभाई ने कला का व्याख्यान करते हुए बताया कि रस तभी बनता है, जब कलाकार की आत्मा दर्शक की आत्मा को छू जाती है। उन्होंने बताया कि हिंदी और अंग्रेजी की तरह कला भी एक ऐसी भाषा है, जो लोगों के मन की दीवारों को तोड़कर अंदर पहुंचती है और आनंद की अनुभूति करवाती है।
भय, दोष, चिंता और नौकरी के सिवा जिंदगी में और भी बहुत कुछ है। कलाकार अपनी कला से कुछ क्षणों के लिए व्यक्ति के भीतर घर कर जाता है, तो इससे कलाकार की जिंदगी सफल हो जाती है।