वन विभाग बोला, एफसीए की मंजूरी लें, कनलोग में एकसाथ जलाए जा सकते हैं पांच शव
मामले ज्यादा आने पर नगर निगम की बढ़ेंगी मुश्किलें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कोरोना पीड़ितों के दाह संस्कार को लेकर नया संकट खड़ा हो गया है। कोरोना पीड़ितों की मौत का आंकड़ा बढ़ने के बाद नगर निगम ने शहर के कनलोग श्मशानघाट पर दाह संस्कार के लिए अतिरिक्त शेल्टर बनाने का काम शुरू करवाया था जिसे वन विभाग ने रोक दिया है।
विभाग का कहना है कि एफसीए की मंजूरी के बाद ही वन भूमि पर काम करने की अनुमति मिलेगी। फिर चाहे दाह संस्कार के लिए शेल्टर ही क्यों न बनाने हो? पिछले कई दिन से आईजीएमसी अस्पताल में रोजाना पांच से छह कोरोना पीड़ितों की मौत हो रही है। मंगलवार को भी छह शव कनलोग लाए गए। सभी कोरोना पीड़ितों का दाह संस्कार नगर निगम कनलोग श्मशानघाट पर ही करवा रहा है। बाकी सामान्य मौतों पर भी शव कनलोग लाए जा रहे हैं। इस श्मशानघाट पर अभी एक साथ पांच शवों को ही जलाया जा सकता है। दाह संस्कार के लिए लगाई गैस वाली मशीन खराब है। ऐसे में शमशानघाट में जगह कम पड़ रही है। दाह संस्कार के लिए तीन और अस्थायी शेल्टर बनाने का काम शुरू करवाया था लेकिन वन विभाग ने इसे रोक दिया है। इससे निगम की परेशानी बढ़ गई है। यदि मौतों का आंकड़ा बढ़ता है तो सबका एक ही दिन में दाह संस्कार करना मुश्किल हो जाएगा।
बीते साल जब कोरोना के कारण आईजीएमसी में आठ से दस लोगों की रोजाना मौत हो रही थी तब निगम ने यहां शेल्टर बनाने का काम शुरू करवाया था। लेकिन वन विभाग ने इसे भी बंद कर दिया। अब दोबारा काम रुकवा दिया है। सोमवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में आयुक्त ने इस मामले को उठाया था। अब निगम ने एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज दिया है। इसमें शेल्टर बनाने की मंजूरी मांगी है।
निर्माण के लिए एफसीए की मंजूरी जरूरी : डीएफओ
महामारी में विभाग भी मदद को तैयार है लेकिन वन भूमि पर बनने वाले शेल्टर के लिए एफसीए की मंजूरी जरूरी है। नगर निगम इसका केस बनाए, वन विभाग भी इसमें मदद करेगा।
पवन चौहान, डीएफओ शिमला शहरी वन विभाग
अब सरकार को भेजेंगे प्रस्ताव : आयुक्त
कोरोना के कारण मृतकों का आंकड़ा बढ़ने पर दाह संस्कार में परेशानी न आए इसलिए श्मशानघाट के पास खाली जगह पर तीन शेल्टर बनाने का काम शुरू करवाया था, लेकिन वन विभाग ने इसे रोक दिया। अब सरकार को इस बारे में प्रस्ताव भेज रहे हैं ताकि जल्द शेल्टर बनाए जा सके।
आशीष कोहली, नगर निगम आयुक्त