परिजनों का कहना है कि वारदात वाले दिन जब बच्ची का मेडिकल करवाया गया था तब उसमें यह पुष्टि हो चुकी है कि शारीरिक तौर पर दुराचार करने का प्रयास किया गया है। वहीं, अब सवाल यह है कि क्या पुलिस अभी भी इसी बात का इंतजार कर रही है कि फोरेंसिक रिपोर्ट में दुराचार की पुष्टि होती है या नहीं। परिजनों का कहना है कि जब शारीरिक तौर पर दुराचार मामले की पुष्टि हो चुकी है तो क्यों उस आधार पर भी पुलिस आरोपी छात्र को नहीं पकड़ रही है।
इसके अलावा परिजनों का कहना है कि जिस दिन वारदात हुई थी, उस दिन स्कूल समय में एक स्कूल का छात्र बच्ची को दूसरे फ्लोर में ले गया था। बच्ची का कहना था कि मैडम जब दूसरे फ्लोर में पहुंची तो वह उसे नीचे ले आई जबकि छात्र को उसकी कक्षा में भेज दिया। जब लंच ब्रेक हुआ तो उस मैडम ने बच्ची को उसके भाई से भी नहीं मिलने दिया ताकि बच्ची भाई को वारदात के बारे में न बता दे।