तारा देवी मंदिर के पास 447 पेड़ों के अवैध कटान मामले में एक तीसरे शख्स की एंट्री से जांच और उलझ गई है। प्रवीण नाम के व्यक्ति ने वन महकमे की जांच टीम के सामने स्वीकार किया है कि इस पेड़ कटान के पीछे उसका हाथ है। विभाग ने उसके बयान लिए हैं और उसके बाद हस्ताक्षर भी।
जांच टीम को उसने बताया कि वह अर्की का रहने वाला है। उसने खुद को इस जमीन का केयर टेकर बताया। लेकिन मामले ने तब यू टर्न ले लिया जब जमीन मालिक के बेटे फतेह सिंह ने कहा कि वह प्रवीण को जानते तक नहीं। वह कभी उससे नहीं मिले, ऐसे में वह कैसे उनकी जमीन का केयर टेकर हो सकता है?
वन महकमे की शुरुआती जांच में प्रवीण ने राजस्व महकमे को लपेट दिया है। उसने पूछताछ में बताया कि 12 नवंबर को उसने संबंधित राजस्व कर्मचारियों को लाकर इस जमीन की निशानदेही करवाई थी। मौके पर बाकायदा चूना डालकर लाइन भी लगवाई गई। अब ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे जमीन मालिक की इजाजत के बिना कोई तीसरा व्यक्ति निशानदेही करवा सकता है? इस पहलू पर पुलिस जांच कर रही है।
जमीन की निशानदेही केवल जमीन मालिक की दरख्वास्त पर ही होती है। इसके लिए आम आदमी को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है उसी के बाद कहीं जाकर राजस्व की टीम मौके पर पहुंचती है। प्रवीण के दावे में अगर दम है कि उसने भूमि मालिक की गैर मौजूदगी में कानूनगो और पटवारी से निशानदेही करवाई है तो यह मामला और संगीन हो जाता है। बिना परमिशन के निशानदेही करने राजस्व कर्मचारी कैसे पहुंच गए? जांच के बाद ही सच सामने आ पाएगा।
ऐसे रची पेड़ कटान की साजिश
ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि पहले जुगाड़ तंत्र से बिना परमिशन के जमीन की पैमाइश करवाई गई। निशानदेही होने के बाद निजी भूमि से पेड़ों को काट दिया गया। शातिर इस बात को समझते हैं कि अगर गलती से सरकारी वन भूमि से पेड़ काटे गए तो यह आपराधिक मामला बनेगा और उसमें फंस सकते हैं। निजी जमीन पर पेड़ काटने से उन्हें केवल जुर्माना भरना होगा। इसलिए शातिर यह पक्का कर लेना चाहते थे कि निजी जमीन की सीमा कहां तक है। बिना अनुमति राजस्व के कौन से कर्मचारियों ने इनकी मदद की यह छानबीन के बाद ही पता चल पाएगा।
रिकार्ड में पैमाइश का ब्योरा नहीं
एसडीएम (ग्रामीण) जी एस नेगी ने कहा कि प्रवीण के नाम से निशानदेही के लिए कोई दरख्वास्त नहीं आई है। करीब एक महीने पहले जमीन मालिक परविंद्र कौर की ओर से दरख्वास्त जरूर आई है लेकिन अर्जी अभी तक पेंडिग हैं। ऑन रिकार्ड कोई भी जमीन की पैमाइश करने के लिए नहीं गया।
प्रवीण को नहीं जानते: सिंह
जमीन मालिक परिवंद्र कौर के बेटे फतेह सिंह ने कहा कि प्रवीण को वह नहीं जानते। हमारी अनुपस्थिति में वह कैसे जमीन की निशानदेही कर सकता है। उसी के नाम से डैमेज रिपोर्ट अगर काटी है तो इस बारे में बेहतर वन महकमा बता पाएगा। वह खुद इस बात से हैरान हैं कि प्रवीण खुद को जमीन का केयर टेकर बता रहा है। यह मामला उनके भी समझ से बाहर होता जा रहा है।
मामले की पुलिस कर रही जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भजन देव नेगी ने कहा कि जमीन की निशानदेही की जा रही है। इसके बाद पता चलेगा कि कितने पेड़ सरकारी और कितने निजी भूमि में काटे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद उन सभी लोगों से पूछताछ की जाएगी जिनके नाम सामने आ रहे हैं।
ऐसे रची पेड़ कटान की साजिश
ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि पहले जुगाड़ तंत्र से बिना परमिशन के जमीन की पैमाइश करवाई गई। निशानदेही होने के बाद निजी भूमि से पेड़ों को काट दिया गया। शातिर इस बात को समझते हैं कि अगर गलती से सरकारी वन भूमि से पेड़ काटे गए तो यह आपराधिक मामला बनेगा और उसमें फंस सकते हैं।
निजी जमीन पर पेड़ काटने से उन्हें केवल जुर्माना भरना होगा। इसलिए शातिर यह पक्का कर लेना चाहते थे कि निजी जमीन की सीमा कहां तक है। बिना अनुमति राजस्व के कौन से कर्मचारियों ने इनकी मदद की यह छानबीन के बाद ही पता चल पाएगा।