हिमाचल हाईकोर्ट ने पूर्व पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी के खिलाफ फोन टैपिंग केस में पेश होने वाली चार्जशीट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि प्रार्थी को चार्जशीट का जवाब देने के लिए सरकार से अतिरिक्त समय मांगना चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी के पक्ष में स्थगन आदेश पारित करने के बारे में मामला नहीं बनता है।
पूर्व डीजीपी पर लगे हैं दो बड़े आरोप
प्रदेश सरकार ने प्रार्थी को दो आरोपों का स्पष्टीकरण देने के लिए दस दिन का समय दिया था।
पहले आरोप के अनुसार प्रार्थी जब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सीआईडी तैनात थे तो उस समय उन्होंने हिमाचल भवन चंडीगढ़ के उस कमरे में माइक्रोफोन लगवाया, जिस कमरे में वर्तमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ठहरना था।
दूसरे आरोप के अनुसार प्रार्थी ने वीरभद्र की आवाज रिकॉर्ड करने तथा माइक्रो रिकॉर्डर लगवाने के लिए दो पुलिस अधिकारियों को नियुक्त किया तथा रिकॉर्डिंग करने के बाद इस डाटा को अपने पेन ड्राइव में डालकर कंप्यूटर का सारा डाटा नष्ट करने के आदेश दिए।
कोर्टै ने सरकार को दिया दस दिन का समय
इन आरोपों के आधार पर प्रार्थी को प्रदेश सरकार ने ज्ञापन जारी कर दस दिन में जवाब मांगा था।
हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार को याचिका का जवाब दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया है।
पूर्व डीजी के अनुसार इस केस में सरकार चार्जशीट पेश करने की जल्दी में है। वह इसी महीने 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। इसी विवाद के कारण वर्तमान सरकार ने भंडारी को डीजीपी के पद से हटाकर डीजी होमगार्ड लगाया था।