बहुचर्चित बैमलोई बिल्डर्स मामले में वन अधिकारियों के बाद अब कुछ नेता भी विजिलेंस के निशाने पर आ गए हैं। अब तक की जांच में विजिलेंस को इनके खिलाफ सबूत मिले हैं। जांच एजेंसी पहले इस मामले में मनी लॉन्ड्रिग के सबूत भी मिलने का दावा कर चुकी है।
स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने मंगलवार को शिमला में ओल्ड बीयरखाना की पैमाइश की। बैम्लोई बिल्डर्स मामले की जांच की कड़ी में यह डिमार्केशन राजस्व कर्मियों के सहयोग से वन अधिकारियों और बीयरखाना के मौजूदा मालिक की मौजूदगी में की गई।
यह नाप-नपाई मंगलवार को साढ़े 10 बजे शुरू हुई और डेढ़ बजे तक चलती रही। विजिलेंस के पुलिस अधीक्षक रमेश छाजटा खुद मौके पर मौजूद रहे। विजिलेंस अब जल्द इस केस की जांच पूरा करने की तैयारी कर रही है।
हो सकते हैं नए खुलासे
सूत्रों की मानें तो विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में कुछ नेताओं और अफसरों को लपेटने की भी पूरी तैयारी कर ली है। जल्दी ही नए खुलासे हो सकते हैं। शुरुआती जांच में सामने आया था कि इस निर्माण के लिए जो सड़क बनाई गई थी वह सीएम ऑफिस से जारी डीओ से तैयार की गई थी।
हालांकि ये डीओ विजिलेंस के हाथ नहीं लगा लेकिन मामले में कई नेताओं के शामिल होने की बात जरूर पक्की हो गई। इस प्रकरण में विजिलेंस ने नवंबर 2013 में शिमला थाने में भारतीय दंड संहिता और वन अधिनियम में दर्ज किया था।
अभी केस में किसी भी अधिकारी को नामजद नहीं किया गया है। लेकिन जल्द ही कुछ वन अधिकारियों के नाम इसमें शामिल हो सकते हैं। इसमें सड़क के लिए अवैध पेड़ कटान के आरोप में कुछ वन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की जा रही है।
मरे लोगों के नाम पर बना दी थी सड़क
गौरतलब है कि इस निर्माण के लिए एमसी ने महज एक दिन में नक्शा पास कर दिया था। वहीं, जिन लोगों की मांग पर यहां के लिए सड़क तैयार की गई थी वे असल में इस क्षेत्र के रहने वाले ही नहीं थे।
कुछ लोग मर चुके थे जबकि मांगपत्र में शामिल बाकी नाम फर्जी थी। विजिलेंस के अनुसार सड़क बनाने के लिए लोगों की मांग को आधार बताया गया था। लेकिन जब जांच की तो पता चला कि सड़क से किसी को फायदा नहीं हो रहा।
ये फोरेस्ट एरिया में बनाई गई थी और किसी ने इसे बनाने की डिमांड नहीं की थी। आरोप ये भी हैं कि नगर निगम शिमला के एक अधिकारी ने यहां सड़क पहुंचाने के लिए एक ही दिन में सारी औपचारिकताएं पूरी करवाईं।