सांसद विरेंद्र कश्यप से जुड़े सीडी प्रकरण (कैश आन कैमरा) के मामले की सुनवाई वीरवार को सेशन जज सोलन एससी कैंथला की अदालत में हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को रखी है। वीरवार को अदालत ने याचिकाकर्ता देबाशीष भट्टाचार्य की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने इस केस की सरकार के साथ पैरवी करने की मांग की थी।
भट्टाचार्य एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। इन्होंने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। इससे पहले 19 जनवरी को मामले की सुनवाई हुई थी, जिसमें सांसद वीरेंद्र कश्यप मौजूद रहें थे। शिमला संसदीय सीट के सांसद पर पैसे के लेनदेन के संगीन आरोप लगे थे। मामले में 06 मार्च 2014 को सर्तकता एवं भ्रष्टाचार ब्यूरो के समक्ष भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
कश्यप पर आरोप लगे थे कि 20 अप्रैल 2009 को मीडिया में छपे स्टिंग आपरेशन के समाचार के अनुसार कश्यप एक टीवी चैनल में कथित तौर पर पैसे लेते दिखाए गए। आरोप लगाए गए कि वह किसी कार्य को पूरा करने के लिए पैसे ले रहे हैं। तत्कालीन सरकार ने 2010 में एक विशेष जांच दल का गठन कर उस प्रकरण के छानबीन के आदेश दिए।
जिसकी रिपोर्ट के बाद केस को बंद कर दिया गया। इस मामले सरकार बदलते ही चुनौती दी गई। याचिककर्ता ने यह आरोप लगाया कि जिस समय यह घटना घटी उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और उसके पश्चात वह सांसद बन गए। इसके बाद मामले की जांच ठीक नहीं हो सकी।
उधर सरकार द्वारा दायर शपथपत्र के अनुसार मार्च 2014 में कश्यप के खिलाफ विजिलेंस थाना में मुकदमा दर्ज हुआ। उधर मामले की जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक जवाहर शर्मा ने कहा कि अगली सुनवाई अब 18 अप्रैल फरवरी को होगी।