हिमाचल के कांगड़ा जिले के टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर कोरोना के मरीजों का इलाज करने वाले स्टाफ को लेकर प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कोरोना वार्ड में करीब 10 दिन तक ड्यूटी देने वाले पैरा मेडिकल स्टाफ को प्रबंधन ने सीधा होटल भेजने के बजाय घर भेज दिया। चूक का एहसास हुआ तो स्टाफ को घर से बुलाकर सोमवार को सीधा होटल में 14 दिन आइसोलेशन में भेज दिया।
प्रबंधन की छोटी सी चूक की वजह से अब घरों में स्टाफ के संपर्क में आने वाले परिजनों और लोगों को भी आइसोलेशन में भेजने के लिए लिस्ट बनाई जा रही है। हालांकि, स्टाफ के पहले ब्लड सैंपल लिए थे, जिनमें उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। सूत्रों की मानें तो कोरोना वार्ड के स्टाफ के अमूमन सदस्यों को शुरू से ही ड्यूटी के दौरान आइसोलेशन पर रखने के बजाय रोजाना घर भेज दिया जाता था। सीएमओ जीडी गुप्ता से जब इस संदर्भ में पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एमएस डा. सुरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि उपायुक्त की ओर से हमें होटल रविवार को ही मिले थे। इसलिए, स्टाफ को घर भेजने के अलावा कोई चारा नहीं था।
बिना किट कोरोना वार्ड में घुस गई नर्स, आइसोलेशन पर भेजा
कोरोना वार्ड में पैरा मेडिकल स्टाफ की दूसरी टीम की एक नर्स बिना किट वार्ड में चली गईं। इस नर्स की ड्यूटी का पहला दिन था। अस्पताल प्रबंधन ने नर्स को अर्ब आइसोलेशन में भेज दिया है। इस वार्ड में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज है।