राज्यपाल को ज्ञापन सौंपता कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का प्रतिनिधिमंडल।
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वन भूमि पर अवैध कब्जों का मामला राजभवन पहुंच गया है। कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर छोटे बागवानों की बेदखली का मामला उठाया। पार्टी के राज्य सचिव डा. ओंकार शाद की अध्यक्षता में मिले
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि सरकार की नालायकी और सरकार के वकील की ओर से उच्च न्यायालय में प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसान-बागवानों के पक्ष की ठीक से पैरवी न करने और 27 जुलाई 2015 के उच्च न्यायालय के आदेशों की ठीक से अनुपालना न करने के कारण आज भी छोटे किसानों की जमीन से बेदखली जारी है।
डा. ओंकार शाद ने कहा कि इसके लिए प्रदेश सरकार एवं विपक्ष में बैठी भाजपा जिम्मेवार है। वनाधिकार कानून-2006 देश के अन्य राज्यों में लागू होने के बावजूद हिमाचल में सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी इस पर मौन धारण किए है।
राज्यपाल को दूसरे मामले से अवगत करवाते हुए पार्टी के राज्य सचिव डा. ओंकार शाद ने कहा कि स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से संचालित किन्नौर के शोंगटोंग-कड़छम में 450 मेगावाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना में कार्य कर रहे मजदूरों को दो महीने से वेतन नहीं दिया गया है। यहां श्रम कानूनों का खुले रूप से उल्लंघन किया जा रहा है।
मजदूरों की ओर से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को उठाने के बदले में जिला प्रशासन वहां पर धारा 144 लगा देता है जो भारत के संविधान की धारा 21 के तहत जीवन जीने की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार का भी उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह
प्रदेश सरकार को ज्ञापन देने के बावजूद अभी तक सरकार की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी नेता डा. कश्मीर सिंह ठाकुर, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, टिकेंद्र सिंह पंवर, संजय चौहान, विजेंद्र मेहरा और सत्यवान पुंडीर शामिल रहे।