सुभाषिनी अली ने कहा कि सरकार ने लड़कियों को सशक्तीकरण के लिए 80 फीसदी बजट रखा था, लेकिन यह बजट प्रचार पर ही खत्म हो गया। 20 फीसदी बजट खर्च किया गया। सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक ही होते हैं।
हिमाचल प्रदेश में 25 फीसदी से ज्यादा दलित लोगों की संख्या है, लेकिन आज भी उन्हें अधिकारों से वंचित रखा जाता है। यह बात दलित शोषण मुक्ति मंच पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने कही। कहा कि मंदिरों में एससी वर्ग के प्रवेश पर मना है। यह संविधान के खिलाफ है। रविवार को कालीबाड़ी हाल में दलित शोषण मुक्ति मंच ने सेमीनार का आयोजन किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने 11 जिलों से आए लोगों को संबोधित किया।
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उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। कहा कि विधानसभा के बाहर एससी-एसटी एक्ट की प्रतिलिपियां जलाई गई हैं। इससे पता लगता है कि राजनीतिक दल भी इसे खत्म करना चाहते हैं। सरकार ने लड़कियों को सशक्तीकरण के लिए 80 फीसदी बजट रखा था, लेकिन यह बजट प्रचार पर ही खत्म हो गया। 20 फीसदी बजट खर्च किया गया। सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक ही होते हैं।
हकीकत में कुछ नहीं होता है। सवर्ण आयोग को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सीएम शांता कुमार के बयान पर उन्होंने कहा कि यह भाजपा की विचारधारा है। उनकी विचारधारा मनुवादी है, जिसका जवाब जनता देगी। कहा कि हम लोगों को अपनी सोच ठीक रखना जरूरी है। नगर निगम शिमला के पूर्व महापौर संजय चौहान, सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, दलित शोषण मुक्ति मंच की राज्य समन्वयक जगतराम समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।