मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि छात्रों को प्रदर्शन करने के लिए कुछ राजनीतिक दलों के नेता उकसा रहे हैं। इससे संस्थानों में शिक्षा का माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने छात्र संघों के धरने-प्रदर्शन के तरीकों पर नाराजगी जताई कि उन्हें आंदोलन के बजाय उच्च न्यायालय के रिटायर न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति के सामने अपनी बात रखनी चाहिए।
पुलिस विभाग के यातायात सुरक्षा पंफलेट जारी करने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्थान है। सरकार ने ट्यूशन फीस और छात्रावास शुल्क में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं किया है। स्नातकोत्तर स्तर पर शुल्क बहुत कम हैं।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि फीस वृद्धि को लेकर गठित समिति का निर्णय कैबिनेट में रखा जाएगा। उसके बाद ही यथोचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में इस तरह का वातावरण रहता है तो छात्र संघ चुनाव नहीं करवाए जा सकते। सरकार हिंसा बर्दाश्त नहीं करेगी।
मामले को उच्च स्तरीय समिति के साथ बैठकर सुलझाया जा सकता है, न कि रैलियां और धरना-प्रदर्शन करके। मुख्यमंत्री ने सलाह दी कि छात्रों को उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। वे असामाजिक तत्वों के बहकावे में न आएं।