शिमला नगर निगम पर भाजपा के काबिज होने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बुधवार को पहली बार सामने आए। चुनाव नतीजों को लेकर वे बहुत खुश नहीं। हालांकि निगम के परिणाम को भाजपा के पक्ष में जनादेश होने की बात को वे सिरे से खारिज कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि भाजपा ने नगर निगम नी कब्जा करने के लिए खरीद फरोख्त की। कम सीटें जीतने के लिए उन्होंने संगठन की कमजोर रणनीति को जिम्मेदार ठहराया। अमर उजाला के विशेष संवाददाता अरुणेश पठानिया ने इन्हीं मुद्दों पर उनसे विस्तार से बात की और जाना कि आखिर नगर चुनाव के नतीजों को मुख्यमंत्री किस रूप में देखते हैं।
प्रश्न - नगर निगम शिमला के चुनाव परिणाम को आप किस तरह से देखते हैं?
मुख्यमंत्री - परिणाम किसी भी पार्टी के पक्ष में नहीं आए। खंडित जनादेश के बाद भाजपा ने हार्स ट्रेडिंग कर नगर की सत्ता हासिल की है। भाजपा ने सारी ताकत झोंकी लेकिन बहुमत नहीं मिला, तो उन्होंने पैसे के दम पर निर्दलियों को खरीदा है।
प्रश्न: खरीद फरोख्त एक गंभीर आरोप है। विपक्ष इसका सबूत मांगेगा?
प्रश्न: खरीद फरोख्त एक गंभीर आरोप है। विपक्ष इसका सबूत मांगेगा?
मुख्यमंत्री: हमारी पक्की जानकारी है। सत्ता पर कब्जा करने के लिए लाखों रुपए पार्षदों को दिए गए।
प्रश्न - जनादेश तो कांग्रेस के पक्ष में भी नहीं रहा। इसकी क्या वजह रही?
मुख्यमंत्री - चुनाव में हमारा प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था, लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी की चुनाव को लेकर कोई रणनीति नहीं रही। पीसीसी ने पहले समर्थित प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला लिया। सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने को छूट दे दी।
संगठन का यह निर्णय गलत था। प्रत्याशी को पार्टी का समर्थन देने का निर्णय भी देर से लिया गया। चुनाव में एक बार उतरने वाले को नाम वापसी के लिए समझाना आसान नहीं होता। इसी वजह से कई जगह हम विरोधी के बजाय अपनों की वजह से हार गए।
प्रश्न- चुनाव में तो आप भी प्रचार में सक्रिय रहे। फिर कैसे हारे?
प्रश्न- चुनाव में तो आप भी प्रचार में सक्रिय रहे। फिर कैसे हारे?
मुख्यमंत्री - मैंने निगम चुनाव में एंट्री ही 8 जून को की थी, तब तक टिकट से लेकर नामांकन सहित तमाम प्रक्रिया संगठन के स्तर से हो चुकी थी। बावजूद इसके हमने प्रचार अभियान को आगे बढ़ाया। हमारी स्थिति बेहतर भी हुई और भाजपा को पूर्ण बहुमत से रोक दिया। परिणाम आने के बाद हम अपने समर्थित और निर्दलियों के सहारे भाजपा से एक सीट कम थे।
प्रश्न- तो क्या भाजपा ने कांग्रेस से अधिक संगठित होकर चुनाव लड़ा?
मुख्यमंत्री - नहीं, संगठित होकर नहीं बल्कि हार्स ट्रेडिंग से भाजपा ने निगम पर कब्जा किया है। हम सरकार में है, चाहते तो हम भी कर सकते थे, लेकिन हम इसमें विश्वास नहीं करते। हमारी ऐसी संस्कृति नहीं है। हमने भाजपा के किसी पार्षद को लुभाने और खरीद फरोख्त का प्रयास नहीं किया।
प्रश्न- जिस तरह निगम चुनाव में संगठन और सरकार में बिखराव दिखा, उससे विधानसभा चुनाव में नुकसान नहीं होगा?
प्रश्न- जिस तरह निगम चुनाव में संगठन और सरकार में बिखराव दिखा, उससे विधानसभा चुनाव में नुकसान नहीं होगा?
मुख्यमंत्री - नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। निकाय चुनाव तो पूरी तरह से संगठन की जिम्मेदारी होते हैं। विधानसभा चुनाव में कमान सरकार के हाथ में रहेगी। उसमें रणनीतिक निर्णय हमारे स्तर से लिए जाने हैं।
प्रश्न - विधानसभा चुनाव में भाजपा को मात देने की रणनीति क्या रहेगी?
मुख्यमंत्री - नगर निगम चुनाव परिणाम ने एक बात तो साफ कर दी है कि हिमाचल प्रदेश में कोई मोदी लहर नहीं है। उनकी परिवर्तन रथ यात्रा भी सूनी है।
यात्रा के दौरान हो रही जनसभाओं में जनता पहुंच ही नहीं रही। जनता का यात्रा की तरफ आकर्षित नहीं होना साफ है कि भाजपा को रिस्पांस नहीं मिल रहा। सरकार के खिलाफ झूठी बयानबाजी के अलावा भाजपा कोई एजेंडा नहीं है।