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पढ़िए, नए साल में सीएम वीरभद्र का पहला इंटरव्यू

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हिमाचल की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई है। सरकार को हर साल दो से ढाई हजार करोड़ रुपये कर्ज लेना पड़ रहा है। सरकार के मंत्रियों के बीच खींचतान मची हुई है। कांग्रेस और सरकार के बीच भी समय-समय पर अनबन सामने आ जाती है।
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बेरोजगारी और विकास का मुद्दा सरकार के सामने सुरसा की तरह मुंह बाये खड़ा है। इससे निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है? इन्हीं मुद्दों पर वर्ष 2015 के पहले दिन वीरवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अमर उजाला के मुख्य संवाददाता प्रेम प्रताप सिंह से विशेष बातचीत की।

मुख्यमंत्री ने खुलकर हर सवाल का जवाब दिया। पढ़िए ये खास बातचीत।

जो काम नहीं हुए, वो अब होंगेः वीरभद्र

सवाल : कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में बहुत सारे वादे किए थे। कई वादे अभी भी अधूरे हैं। सत्ता संभालने से पहले ही घोषणा की थी कि कांग्रेस का घोषणा पत्र सरकार का नीतिगत दस्तावेज होगा। अनुबंध कर्मियों को पांच साल में सरकार नियमित नहीं कर पाई। क्या कहना है?

जवाब : प्रदेश की कांग्रेस सरकार दो साल के भीतर चुनावी घोषणापत्र की प्रत्येक घोषणा को पूरा करेगी। पांच साल पूरा होने का इंतजार नहीं करेगी। पिछले दो साल में सरकार ने जो काम किए, वे आज तक नहीं हुए थे। भाजपा सरकार प्रदेश में खाली स्कूल और अस्पताल छोड़ कर गई थी।

दो साल के कार्यकाल में डाक्टरों, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की रिकार्ड भर्ती की गई है, जो कि आज तक कभी नहीं हुई। अनुबंध कर्मियों को भी लगातार नियमित किया जा रहा है।

कांग्रेस में मेरा कोई विरोधी नहीं

सवाल : सरकार के मंत्रियों में लगातार खींचतान चल रही है। एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की जा रही है। कांग्रेस और सरकार के भीतर भी तालमेल की कमी नजर आ रही है, क्यों?

जवाब : प्रदेश सरकार और कांग्रेस के भीतर मेरा कोई विरोधी नहीं है। मंत्रियों के बीच किसी प्रकार की खींचतान नहीं है। कोई मंत्री किसी के खिलाफ बयानबाजी नहीं कर रहे हैं। मीडिया की ओर से जान-बूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।

सवाल : कांगड़ा जिले को कांग्रेस ने संगठन के लिहाज से चार जिलों में बांट दिया। इस पर मंत्री और पार्टी के नेता विरोधी बयान दे रहे हैं। आप क्या कहते हैं?

जवाब : कांग्रेस ने संगठन की दृष्टि से चार जिले बनाए हैं, लेकिन इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। सरकार का साफ मानना है कि प्रदेश में नए प्रशासनिक जिले बनाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके लिए सरकार न तो कोई प्रयास कर रही है और न ही करेगी।

भ्रष्टाचार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा

सवाल : हिमाचल में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल खड़े होते हैं। भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती है। उस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार का कोई बड़ा मामला मौजूदा सरकार में अभी तक सामने नहीं आया है। छिटपुट मामले जरूर आते हैं, जिन पर शिकंजा कसने के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है। भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सवाल : हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई है। सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। आगे आपकी क्या योजना है?
जवाब : कर्ज लेने पर हल्ला मचाने की जरूरत नहीं है। देश की हर सरकारें कर्ज लेती हैं। सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। अगले दो साल में सात से आठ हजार करोड़ रुपये का निवेश कराया जाएगा। आय के स्रोत बढ़ाए जाएंगे। खासतौर पर ऊर्जा, खनन, आबकारी सहित अन्य टैक्स से सरकार की आय बढ़ाई जाएगी। केंद्र से भी अधिक से अधिक आर्थिक मदद ली जाएगी, जिससे प्रदेश की जनता के हित में काम किया जा सके।
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2015 में सरकार का ये लक्ष्य

सवाल : हिमाचल सरकार 2015 में किस क्षेत्र में सबसे अधिक फोकस करेगी, जिससे जनता को राहत मिले। बजट में क्या खास करने जा रही है?
जवाब : राज्य सरकार 2013 और 2014 में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में फोकस किया था। इस पर सरकार का ध्यान रहेगा, लेकिन 2015 में सबसे अधिक सड़कों और सेतुओं पर अधिक फोकस किया जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों के मुकाबले हिमाचल की सड़कें अधिक बेहतर साबित हो सके। इसके जरिये प्रदेश में पर्यटन और उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। मार्च में पेश किए जाने वाले बजट में जनता से जुड़ी अधिक से अधिक योजनाओं को शामिल किया जाएगा। जनता पर भार न पड़े इसका भी ध्यान रखा जाएगा।
सवाल: आप पर सीबीआई जांच चल रही है और आयकर विभाग भी आपके खिलाफ छानबीन कर रहा है? आरोपों की सत्यता क्या है?
जवाब : पूर्व की धूमल सरकार ने मुझे फंसाने के लिए दो बार प्रयास किए, लेकिन मैं न्यायालय से बेदाग होकर बाहर निकला। न्याय व्यवस्था पर मुझे पूरा भरोसा है। मेरे खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद है।
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