सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार पर्यावरण संरक्षण और सत्त विकास को अधिमान देते हुए वर्ष 2026 तक हिमाचल को देश के पहले हरित ऊर्जा राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। प्रदेश सरकार हरित ऊर्जा का उपयोग सुनिश्चित कर पर्यावरण संरक्षण के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा अक्षय ऊर्जा स्रोत हैं। इसका उपयोग कर भावी पीढ़ियों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। राज्य सरकार की यह नवोन्मेषी पहल जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊना जिला के पेखुबेला में 32 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना 15 अप्रैल 2024 को जनता को समर्पित की गई थी।
इस परियोजना से 48 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया है, जिससे 31 जनवरी तक 14 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। इसके अलावा, ऊना जिले के भंजाल में पांच मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना का निर्माण कार्य 30 नवंबर, 2024 से शुरू हो गया है और अघलौर में 10 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना का निर्माण इसी माह पूर्ण होने की संभावना है। हरित हाइड्रोजन ऊर्जा के उत्पादन को भी केन्द्र में रखकर राज्य सरकार कार्य योजना बनाकर काम कर रही है। ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से सोलन जिला के नालागढ़ में एक मेगावाट क्षमता की हरित हाइड्रोजन परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया है, जिसके लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया गया है।