मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राजस्व के मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। अब राजस्व से संबंधित मामलों के निपटारे के कार्य तहसीलदार से लेकर उपायुक्त स्तर के अधिकारियों की एसीआर में जुड़ेंगे। सुक्खू ने कांगड़ा की ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के तहत अंब पठियार में आयोजित ‘सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम में ये बातें कहीं। बोले- पहले लोग पूरा दिन पटवारघर और तहसीलों में बैठकर अपने राजस्व कार्यों के लिए परेशान होते थे। मगर पहली बार समस्या के समाधान के लिए राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर इंतकाल सहित अन्य मामलों का घर-द्वार पर ही निपटारा किया जा रहा है। सुक्खू ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में शीघ्र ही 21 हजार युवाओं को रोजगार प्रदान किया जाएगा। सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है और मेरिट को अधिमान दिया जाएगा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर इलाज मिल सके।
भाजपा के सांसद तो विशेष पैकेज का मुद्दा तक नहीं उठा पाए
सुक्खू ने कहा कि बीते साल प्राकृतिक आपदा से हुई तबाही के दौरान भाजपाई मूक बने रहे। विपक्ष न तो प्रभावितों के साथ खड़ा नजर आया न ही त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के संकल्प का समर्थन किया। बोले- वह प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री से मिले और प्रदेश के लिए विशेष पैकेज की मांग की थी। भाजपा के तीनों सांसदों से पूछा जाना चाहिए कि आपदा के दौरान क्या वे पीएम या गृह मंत्री से मिले ? अब तक जो भी मदद मिली है, वह सभी राज्यों को आपदा के तहत निर्धारित बजट से ही मिली है। विशेष पैकेज का कोई पैसा राज्य को नहीं मिला। इसके बावजूद हमारी सरकार ने प्रभावितों के लिए अपने सीमित संसाधनों से 4500 करोड़ का पैकेज जारी किया। केंद्र सरकार गृह अनुदान के लिए डेढ़ लाख रुपये देती है। प्रदेश सरकार ने राशि को बढ़ाकर सात लाख रुपये प्रति परिवार किया है।
लुथान में बनेगा प्रदेश का पहला सुखाश्रय आदर्श ग्राम परिसर
मुख्यमंत्री ने वीरवार को ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र तहत गांव लुथान में प्रदेश के पहले सुख-आश्रय आदर्श ग्राम परिसर की नींव रखी। 92.38 करोड़ से इसका निर्माण किया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि परिसर में योजना के लाभार्थियों को आवास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सरकार ने 4,000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाया है। उनके कल्याण के लिए कानून बनाया और मुख्यमंत्री सुख-आश्रय कोष बनाया है।