पर्ची शुल्क लेना है या नहीं: सुक्खू
सरकारी अस्पतालों में मरीजों से पर्ची के 10 रुपये शुल्क वसूलने के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रोगी कल्याण समिति तय करेगी कि मरीजों से पर्ची के 10 रुपये लेने हैं या नहीं। इस संबंध में सरकार ने कोई संस्तुति नहीं की है। अस्पतालों को स्वायत्त किया गया है। अस्पताल अगर साफ-सफाई और रखरखाव के लिए ऐसा करना चाहते हैं, तो वे दस रुपये पर्ची का शुल्क लगा सकते हैं। अस्पताल अगर नहीं चाहते हैं और उनके अपने संसाधन हैं तो उन्हें पर्ची शुल्क लेने की जरूरत नहीं है। ये अस्पताल की रोगी कल्याण समिति तय करेगी, जिसमें स्थानीय लोग होते हैं। कैबिनेट सब कमेटी ने एक राय के तहत कहा कि सभी अस्पतालों को स्वायत्त होना चाहिए। अस्पतालों की सफाई व्यवस्था, उपकरणों के रखरखाव और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए इस तरह का शुल्क हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में सरकार के पास साफ-सफाई और रखरखाव से जुड़े कुछ सुझाव जरूर आए थे और कैबिनेट की सब कमेटी की भी सिफारिश सामने आई थीं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं लिया।
मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस पर साइकिल रन को झंडी दिखाकर किया रवाना
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ओक ओवर शिमला से प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना ध्येय से आयोजित साइकिल रन को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम संयुक्त तौर पर पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद की ओर से आयोजित किया गया। उन्होंने प्लास्टिक न्यूट्रल हिमाचल-2030 जागरुकता अभियान और स्वच्छ शिमला अभियान का भी शुभारंभ किया। इस अभियान में विद्यार्थियों, स्वयं सेवियों, गृह रक्षा जवानों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश को प्लास्टिक न्यूट्रल बनाने की शपथ भी दिलाई।
मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिमाचल को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए सभी को सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। पर्यावरण को प्लास्टिक से बचाना सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आगामी पांच वर्षों में हिमाचल को प्लास्टिक मुक्त बनाने के निरंतर प्रयासों के साथ जागरुकता लाने के लिए गंभीर प्रयासों की भी नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण, हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। हिमाचल की प्राकृतिक सौंदर्य से अलग पहचान है। इसे सदैव बनाए रखने के लिए हमें सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निरंतर प्रयास करने होंगे। इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, निदेशक पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन डीसी राणा, आयुक्त नगर निगम भूपेंद्र अत्री अतिरिक्त निदेशक प्रवीण गुप्ता, मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सुरेश अत्री तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।