शनिवार को सीएम सुक्खू ने कहा कि इससे प्रदेश की तरक्की और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। ऐसे बहुत से मामले वर्षों से लंबित रहे हैं, लेकिन अब प्रदेश सरकार की लगातार कोशिशों से इन्हें गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एफसीए और एफआरए मामलों की निगरानी के लिए उपायुक्तों, मंडलीय वन अधिकरियों और अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समितियों का गठन किया है। इन मामलों की विस्तृत जानकारी ऑनलाइन अपलोड किए जाने के साथ ही लगातार इनकी ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
बेहतर समन्वय स्थापित करने व मामलों के निरीक्षण और केंद्र सरकार के साथ मेलजोल बनाने के लिए भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ व समर्पित अधिकारी तैनात किए गए हैं, जिनका प्राथमिक कार्य केंद्र सरकार के साथ तालमेल बनाकर ऐसे मामलों का तीव्रता से निपटारा करना है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में 70 फीसदी वन क्षेत्र है और जनहित परियोजनाओं के लिए वन भूमि बेहद अनिवार्य है, इसलिए इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए वन मंजूरी प्राप्त करना राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रक्रियात्मक अपेक्षाओं के कारण परियोजनाओं को शुरू करने में विलंब हो रहा है। इससे निपटने के लिए राज्य सरकार ने वन मंजूरी के मामलों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक तंत्र विकसित किया है, जिसके परिणामस्वरूप स्वीकृतियों की दर में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के लोगों के कल्याण के लिए पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है। इसी के तहत वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश में वन क्षेत्र को और बढ़ाने के लिए विभिन्न वानिकी योजनाएं शुरू की हैं।