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सवालों से घिरीं शहरी विकास मंत्री सरवीण के लिए ढाल बने सीएम जयराम

Fri, 31 Aug 2018 10:38 AM IST
धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला, शिमला
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सीवरेज स्कीम पर सदन में अपने ही विधायकों के सवालों की बौछार से घिरीं शहरी विकास विभाग की मंत्री सरवीण चौधरी के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ढाल बन गए। सीएम ने सदन से ही प्रदेश भर के लिए बडे़ मास्टर प्लान को तैयार करने का एलान किया तो सभी विधायकों में खामोशी छा गई। इससे पूर्व भाजपा विधायक सुरेश कश्यप ने सीवरेज स्कीम पर सवाल उठाए।

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इनके अलावा भाजपा के ही राकेश पठानिया, सुखराम चौधरी, विक्रम सिंह जरियाल और परमजीत पम्मी ने भी अनुपूरक सवाल उठाते हुए इस स्कीम पर तीखे हमले किए। पठानिया ने कहा कि मंत्री जी! स्टीरियो टाइप का जवाब मत दो...! सीवरेज स्कीम पर आप ग्राउंड पर काम करवाएं। फील्ड में आपके महकमे और आईपीएच का तालमेल सही नहीं है। 17 साल पहले शुरू हुई स्कीम अब तक भी पूरी नहीं हुई है।

अब ऐसी स्कीमों की लागत दस गुणा बढ़ गई है। कश्यप ने कहा कि कई क्षेत्रों में सीवरेज लाइन बिछा दी गई है लेकिन कनेक्शन नहीं दिए गए। कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां 10 सालों से काम चल रहा है और खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सुखराम चौधरी ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में 20 सालों से सीवरेज का काम चला है।
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परमजीत पम्मी ने कहा कि बद्दी में 33 करोड़ की सीवरेज लाइन बिछी है लेकिन कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। विक्रम जरियाल बोले, आईपीएच और यूडी दोनों विभागों की ज्वाइंट कोआर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाए। उधर, ऊना के कांग्रेस विधायक सतपाल रायजादा ने कहा कि ऊना, संधोल और मैहतपुर में सीवरेज का काम अधूरा है।

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स्पीकर बोले- मैडम! नाहन का नाम भी शामिल कर देना

सदन में सीवरेज स्कीम को लेकर जब चर्चा चल रही थी तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल बोले - मैडम सिरमौर के जिला मुख्यालय नाहन का नाम भी डाल देना, बने न न बने यह बाद की बात है। यूडी और आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने पर मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि दोनों विभागों की एक कोऑर्डिेनेशन कमेटी बनेगी, जो इस काम को देखेगी।

उन्होंने कहा कि हिमाचल के 10 शहर अभी सीवरेज सुविधा से नहीं जुड़े हैं। प्लानिंग विभाग की ओर से नए प्रोजेक्ट पर रोक लगाए जाने से ये दिक्कतें आई हैं। उन्होंने कहा कि आईपीएच विभाग को 41 करोड़ रुपये की राशि जमा करा दी है जबकि 10 करोड़ मेंटेनेंस के लिए रखा है। इसी तरह अगले साल के लिए 30 करोड़ का प्रावधान किया गया है और 10 करोड़ मेंटेनेंस के लिए रखा है।
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