ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने वीरवार को सदन मेें कहा कि सरकार ने नई ऊर्जा नीति के तहत बिजली परियोजनाओं के लिए 12 फीसदी फ्री पॉवर रॉयल्टी को 12 साल आगे टाला गया है, न कि इसे खत्म किया गया है। अनिल शर्मा बोले कि विपक्ष ने काल्पनिक आंकड़े पेशकर जनता को गुमराह किया है।
ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा बोले कि नई व्यवस्था केवल उन प्रोजेक्टों पर लागू होगी, जिन्हें अब तक कमीशन नहीं किया गया है। वह यह साफ कर देना चाहते है कि यह व्यवस्था केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों पर लागू नहीं होगी।
भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी राष्ट्रीय हाइड्रो पॉवर पालिसी को ध्यान में रखकर पूरी अवधि के लिए 12 फीसदी फ्री पॉवर पालिसी लागू होगी। मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि वह यह साफ कर देना चाहते हैं कि पहली बार इस तरह की व्यवस्था पिछली सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016 में की गई थी।
यह चिनाब पर ऊ र्जा परियोजनाओं को अलॉट करने के दौरान की गई थी। ये अलॉट किए गए प्रोेजेक्टों का 50 प्रतिशत है। इनकी क्षमता 2670 मेगावाट है। विपक्ष ने इस बारे में बढ़ा-चढ़ाकर काल्पनिक गणना की है।
प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं की क्षमता 27,436 मेगावाट की है। इसमें से महज 23,369 मेगावाट क्षमता का ही दोहन हो पाया है। मंत्री ने कहा कि हिमाचल ने 10,547 क्षमता का ही दोहन किया है। नीतिगत खामियों के कारण 12,822 मेगावाट बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
कांग्रेस के विधायक हर्षवर्द्धन चौहान का यह बयान कि इससे प्रदेश को 10,404 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, यह सही नहीं है। यह वास्तविक आंकड़े से कतई मेल नहीं खाता है। यह टाली गई धनराशि 6051.24 करोड़ रुपये है।