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ऊर्जा नीति पर मंत्री दोबारा जवाब देने उठे तो विपक्ष ने किया हंगामा, वाकआउट

Thu, 30 Aug 2018 08:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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दो दिन पहले ऊर्जा नीति पर जवाब देने के बाद वीरवार को मंत्री अनिल शर्मा दोबारा जवाब देने उठे तो इस पर विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री इसका विरोध करते हुए खड़े हो गए। विपक्ष के अन्य सदस्य भी उनका समर्थन करते रहे। अग्निहोत्री ने दोबारा जवाब देने का मौका देने को गलत बताया।

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उन्होंने अध्यक्ष के इस फैसले पर सवाल उठाए और पर कई बातें कहीं। इसके बाद विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। वीरवार को भी बुधवार की तरह ही विपक्ष ने प्रश्नकाल तो चलने दिया, मगर इसके बाद जब ऊर्जा मंत्री दोबारा से पॉवर पॉलिसी पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए खडे़ हुए। वह कहने लगे कि  जब वह वक्तव्य देते हैं तो विपक्ष के लोग बाहर चले जाते हैं।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने नई ऊर्जा नीति के कारण काल्पनिक घाटे के आंकड़े पेश किए हैं। इससे हिमाचल में जनता गुमराह हुई है। इस पर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री विरोध करते रहे कि जवाब पहले ही आ चुका है। हिमाचल के लोगों के हित बेचे गए हैं। इस पर सीएम भी बोले - हिमाचल के हितों की जितनी चिंता आप कर रहे हैं, उससे ज्यादा हम कर रहे हैं।
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स्पीकर उन्हें बैठने को कहते रहे। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने उनके इस फैसले पर एतराज जताया कि जिस मामले में पहले ही बात हो चुकी है, उसमें दोबारा जवाब नहीं दिया जा सकता। इसके बाद हंगामे के बीच विपक्ष ने वाकआउट कर दिया।    

सीएम बोले- विपक्ष का रवैया गलत, विधानसभा अध्यक्ष का सम्मान नहीं किया 
सीएम जयराम ठाकुर ने सदन में कहा कि विपक्ष की ओर से यह सब अनावश्यक था। विपक्ष के नेता ने जिस तरह के शब्दों का प्रयोग किया, वे सदन की गरिमा के खिलाफ हैं। इससे वह खुद भी पीड़ा महसूस कर रहे हैं। स्पीकर डा. राजीव बिंदल सबको बोलने का मौका देते हैं। मंत्री की बात सुनने के बजाय खबर बनाने के लिए विपक्ष बाहर चला गया। 

बिंदल बोले, यह निंदनीय 
बिंदल भी बोले कि जिस तरह की भाषा का प्रयोग नेता प्रतिपक्ष ने किया है, वह सही नहीं है। जो उन्हें सूट करता है, वह ठीक है। जो नहीं करता है, वह ठीक नहीं है। यह निंदनीय है।

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हमने फ्री पॉवर रॉयल्टी को खत्म नहीं किया, 12 साल आगे टाला : ऊर्जा मंत्री 

ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने वीरवार को सदन मेें कहा कि सरकार ने नई ऊर्जा नीति के तहत बिजली परियोजनाओं के लिए 12 फीसदी फ्री पॉवर रॉयल्टी को 12 साल आगे टाला गया है, न कि इसे खत्म किया गया है। अनिल शर्मा बोले कि विपक्ष ने काल्पनिक आंकड़े पेशकर जनता को गुमराह किया है।  


ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा बोले कि नई व्यवस्था केवल उन प्रोजेक्टों पर लागू होगी, जिन्हें अब तक कमीशन नहीं किया गया है। वह यह साफ कर देना चाहते है कि यह व्यवस्था केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों पर लागू नहीं होगी।

भविष्य की परियोजनाओं के लिए भी राष्ट्रीय हाइड्रो पॉवर पालिसी को ध्यान में रखकर पूरी अवधि के लिए 12 फीसदी फ्री पॉवर पालिसी लागू होगी। मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि वह यह साफ कर देना चाहते हैं कि पहली बार इस तरह की व्यवस्था पिछली सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016 में की गई थी।

यह चिनाब पर ऊ र्जा परियोजनाओं को अलॉट करने के दौरान की गई थी। ये अलॉट किए गए प्रोेजेक्टों का 50 प्रतिशत है। इनकी क्षमता 2670 मेगावाट है। विपक्ष ने इस बारे में बढ़ा-चढ़ाकर काल्पनिक गणना की है।

प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं की क्षमता 27,436 मेगावाट की है। इसमें से महज 23,369 मेगावाट क्षमता का ही दोहन हो पाया है। मंत्री ने कहा कि हिमाचल ने 10,547 क्षमता का ही दोहन किया है। नीतिगत खामियों के कारण 12,822 मेगावाट बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। 

कांग्रेस के विधायक हर्षवर्द्धन चौहान का यह बयान कि इससे प्रदेश को 10,404 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, यह सही नहीं है। यह वास्तविक आंकड़े से कतई मेल नहीं खाता है। यह टाली गई धनराशि 6051.24 करोड़ रुपये है। 
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