मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बुधवार को धर्मशाला में जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) के सहयोग से 1010.60 करोड़ की हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण संवर्धन परियोजना (एचपीसीडीपी) चरण-2 के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता की। सीएम ने कहा कि फसल विविधिकरण परियोजना का दूसरा चरण प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य फसल विविधिकरण के एक सफल मॉडल का प्रसार करना है। 2031 तक परियोजना क्षेत्र में सब्जी उत्पादन क्षेत्र 2500 से बढ़ाकर 7000 हेक्टेयर करना है।
सरकार प्रदेश के विकास के लिए केंद्र, जाइका, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक आदि स्रोतों से संसाधन जुटा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी सतत विकास के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिन्हें 2030 तक हासिल किया जाना है। मुख्यमंत्री ने जाइका को आश्वासन दिया कि सरकार राज्य में परियोजना के दूसरे चरण के सफल कार्यान्वयन के लिए हर तरह की सहायता देगी। उन्होंने उपलब्धियां प्राप्त करने वालों की सफलता की कहानियों के दस्तावेज बनाने का भी सुझाव दिया।
परियोजना के पहले चरण की सफलता की कहानियों के बारे में कुछ प्रकाशनों का भी विमोचन किया। जाइका पर आधारित एक वृत्त चित्र भी दिखाया गया। मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसान राम सिंह, योगेश कुमार, किशोरी लाल, संदला देवी, सोहन लाल, बलदेव सिंह, प्रोमिला देवी, सुम्मू कुमार, पूर्णिमा कुमारी, दुलाश ठाकुर और होशियार सिंह को भी सम्मानित किया।
कृषि, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रदेश में पहाड़ी स्थल आकृति के कारण खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्र कम है। इसलिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधिकरण पर अधिक बल दिया जाना चाहिए। एचपीसीडीपी के नए चरण में जाइका ऋण घटक 807.30 करोड़, जबकि राज्य का हिस्सा 203.30 करोड़ होगा।
गेस्ट ऑफ ऑनर और जाइका-इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि सैटो मित्सुनोरी ने कहा कि जाइका इंडिया, जापान का सबसे बड़ा और विकास का सबसे पुराना भागीदार है। परियोजना का उद्देश्य सतत और जलवायु अनुकूल कृषि विकास है।