हिमाचल सरकार राज्य के लिए एकीकृत ड्रग प्रिवेंशन नीति तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बढ़ते नशे के खतरे के दृष्टिगत सरकार ने विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में नशे के दुष्प्रभाव पर अध्याय शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी को गैर जमानती अपराध बनाने के लिए एक बिल भी लाया है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बुधवार को हुई हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए पुलिस, मीडिया और नशा निवारण बोर्ड के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना जरूरी है। बड़ी संख्या में ड्रग पेडलर्स पड़ोसी राज्यों के हैं। हरियाणा के पंचकूला में एक बैठक हुई है, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। सभी मुख्यमंत्री और अन्य उत्तरी राज्यों के प्रतिनिधि मादक पदार्थों की तस्करी के बारे में जानकारी साझा करने के लिए सहमत हुए हैं।
एक अन्य बैठक की मेजबानी पंजाब ने की है, जिसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भी भाग लिया है। नशीली दवाओं के उत्पादन की मात्रा और स्वरूप, साइकोट्रॉपिक पदार्थों सहित प्रिक्यूरसोर्स के विचलन और राज्य में मादक पदार्थों के सेवन के परिणाम को जानने के लिए आधिकारिक सर्वेक्षण किया जाएगा। नारकोटिक्स कंट्रोल सेल को इस खतरे से निपटने के लिए सुदृढ़ किया जाएगा। मादक पदार्थों के दुरुपयोग की जांच करने की दृष्टि से राज्य सरकार ने एक व्यापक योजना बनाई है।
मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के संयोजक एवं सलाहकार ओपी शर्मा, आबकारी एवं कराधान आयुक्त रोहन चंद ठाकुर ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। बोर्ड के गैर सरकारी सदस्यों प्रकाश भारद्वाज, भानु लोहमी, अंकुर चौहान और देवेंद्र दत्त शर्मा ने भी प्रदेश में मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के बारे में अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।