प्रदेश में पहली बार शांता कुमार के नेतृत्व में बनी गैर-कांग्रेस सरकार में पंडित शिव कुमार भी बतौर विधायक शामिल थे। वर्ष 1977 में शिव कुमार उपमन्यु चंबा जिला के भटियात हलके से जीते थे। आपातकाल के बाद हुए चुनावों में पूरे देश की ही तरह हिमाचल में भी कांग्रेस का सफाया हो गया था।
हिमाचल की 68 सीटों में से जनता पार्टी 60 सीटें जीतकर भारी बहुमत से सत्ता में आई थी, लेकिन शांता सरकार केवल ढाई वर्ष ही चल पाई क्योंकि 1980 में लोकसभा के मध्यावधि चुनावों के बाद केंद्र में कांग्रेस के सत्तासीन होने का सीधा असर हिमाचल पर पड़ा।
वर्ष 1980 में जनता पार्टी के 30 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए, जिसमें शिव कुमार उपमन्यु भी थे। रामलाल ठाकुर बिना चुनाव के ही दूसरी बार हिमाचल के मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हुए थे। उसके बाद शिव कुमार ने भटियात विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। उपमन्यु तीन बार भटियात के विधायक रहे।
प्रदेश ने खो दिया अनुभवी नेता : शांता
पूर्व सांसद शांता कुमार ने कहा कि शिव कुमार उपमन्यु के निधन से हिमाचल की राजनीति ने पिछली पीढ़ी के एक योग्य अनुभवी नेता को खो दिया है। मेरा सौभाग्य है कि उनके साथ काम किया। बाद में वह कांग्रेस के एक प्रमुख नेता रहे, लेकिन मेरे साथ उनके व्यक्तिगत संबंध उसी प्रकार से निकटता के रहे।
शांता ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। इसके अलावा प्रदेश ब्राह्मण कल्याण परिषद और ब्राह्मण सभा की पंडित शांति शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में उपमन्यु के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया। बैठक में पंडित प्रीतम भारती, रमेश भाऊ, राजेंद्र शर्मा, अश्वनी शर्मा, कैप्टन सतीश लवोल, सविता, सुदर्शन डोहरू, ओम प्रकाश लदोहिया, पंडित घनश्याम और पंडित रमेश आदि मौजूद रहे।