हिमाचल प्रदेश में हर 15 दिन में सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण की समीक्षा होगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गुरुवार को राज्य लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि विभाग को प्रदेश के प्रमुख जिलों और गांवों की सड़कों के पैच वर्क और टारिंग के लिए एक विशेष अभियान चलाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने फील्ड अधिकारियों को हर पखवाड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने और इनकी नियमित निगरानी के निर्देश दिए। सीएम ने जानकारी दी कि वर्ष 2018-19 से नाबार्ड के तहत 5834 करोड़ रुपये में से 1977 करोड़ रुपये की 401 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
नाबार्ड के साथ 898 करोड़ रुपये की 167 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जांच के दायरे में और 349 करोड़ रुपये की 39 परियोजनाएं योजना विभाग के पास हैं। सीएम ने कहा कि वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान सीआरआईएफ के अंतर्गत 195 करोड़ रुपये की 12 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जबकि 64 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्वीकृत परियोजनाओं को शीघ्र आवंटित करने के निर्देश दिए, जिससे इन परियोजनाओं पर शीघ्र कार्य शुरू किया जा सके।
स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, पुलिस, आयुर्वेद और पशुपालन विभाग सहित छह प्रमुख विभागों से संबंधित 702 विकासात्मक कार्य क्रियान्वित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निधि का पुनर्विनियोजन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए संसाधन जुटाने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 650 किलोमीटर राज्य सड़क नेटवर्क का उन्नयन किया जाना प्रस्तावित है, जबकि 1350 किलोमीटर सड़कों का समय-समय पर रखरखाव किया जाना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 324 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना स्वीकृत की गई है, जिसका कार्य प्रगति पर है।
कीरतपुर-मनाली और परवाणू-ढली एनएच के काम में तेजी लाने के निर्देश
एनएचएआई अधिकारियों को कीरतपुर-नेरचैक-मनाली और परवाणू-सोलन-ढली राष्ट्रीय राजमार्ग पर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दोनों सड़कें राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों शिमला और मनाली को जोड़ती हैं, इसलिए इन्हें समयबद्ध पूरा करने पर सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।