शहर में 24 घंटे पानी की सुविधा देने से पहले बदले जाएंगे मीटर, पानी की सही खपत
का चलेगा पता
कंपनी पहले चरण में फ्री लगाएगी सात हजार मीटर
अशोक चौहान
शिमला। शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल सप्लाई से पहले स्मार्ट मीटर की सुविधा मिलने जा रही है। इसके लिए पेयजल कंपनी शहर में एएमआर चिप वाले सात हजार नए स्मार्ट मीटर लगाने जा रही है।
एएमआर (आटोमेटिक मीटर रीडिंग) मीटर लगने से जहां हजारों पेयजल उपभोक्ताओं को हर महीने पानी के सटीक बिल जारी होंगे, वहीं कंपनी को भी हर माह मीटर रीडिंग के लिए घर-घर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंपनी दफ्तर में ही कंप्यूटर पर मीटर की रीडिंग देख सकेगी और बिल जारी करेगी। मीटरों में लगी चिप से कंट्रोल रूम को रोज की खपत की जानकारी मिलती रहेगी। राजधानी में साल 2017 में ही 35 हजार में से 24 हजार पेयजल मीटर बदले थे। यह साधारण मीटर थे, जो अब खराब होने लगे हैं।
राजधानी में 24 घंटे पानी की सुविधा देने के लिए तैयार किए सतलुज वाटर प्रोजेक्ट के तहत अब शहर में सभी मीटर बदले जाने हैं। वर्ल्ड बैंक की शर्तों के अनुसार स्मार्ट मीटर लगने हैं। इसी कड़ी में कंपनी ट्रायल आधार पर सात हजार एएमआर मीटर खरीद रही है। अगले महीने तक इसका टेंडर कर दिया जाएगा ताकि इसी साल शहर में इसे लगाने का काम शुरू हो सके। एजीएम हरमेश भाटिया ने बताया कि पहले चरण में सात हजार नए एएमआर स्मार्ट मीटर खरीदे जा रहे हैं।
शहर में 35 हजार उपभोक्ता
शहर में 35 हजार से अधिक पेयजल उपभोक्ता हैं। पेयजल कंपनी के अनुसार अभी हजारों उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके मीटर खराब या बंद पड़े हैं। कई उपभोक्ता ऐसे भी हैं जिनके मीटर साल 2017 में नहीं बदले थे। कंपनी ऐसे उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देगी।
स्मार्ट मीटर की यह हैं खूबियां और फायदे
चिप वाले स्मार्ट मीटर से हर उपभोक्ता के पेयजल खपत की सटीक जानकारी मिलेगी। इससे बिल में गलती की संभावना कम रहेगी। अभी कई मीटर रीडर रीडिंग लिए बिना ही बिल जारी कर रहे हैं। कई वार्डों में इस पर विवाद भी हो चुका है। कोरोना जैसे हालातों में भी बिलिंग प्रक्रिया जारी रह सकेगी। नया स्मार्ट मीटर करीब 1800 रुपये का आएगा। सामान सहित इसे बदलने का खर्च 500 रुपये रहेगा। ऐसे में एक मीटर बदलने का खर्च करीब 2300 रुपये आएगा, जिस कंपनी से यह मीटर खरीदे जाएंगे, वही इसे इंस्टॉल भी करेगी। टेंडर में इसकी शर्त रखी गई है। उपभोक्ताओं पर नए मीटरों का बोझ नहीं डाला जाएगा। इस प्रोेजेक्ट के लिए अम्रुत से करीब 60 लाख रुपये भी कंपनी को मिले हैं।
शिमला में मीटरों के कारगर रहने पर संशय
बर्फबारी और बंदरों के आतंक के बीच यह स्मार्ट मीटर शिमला के लिए कितने कारगर साबित होंगे, इस पर संशय है। देश के कुछेक शहरों में इसके रिजल्ट ज्यादा अच्छे नहीं रहे हैं। चार साल पहले लगाए मीटरों को लेकर भी लीकेज और हवा से खुद चलने जैसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। कंपनी का कहना है कि इंदौर समेत कई बड़े शहरों में यह फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
शहर में जल्द लगेंगे नए मीटर : एमडी
शहर में स्मार्ट एएमआर मीटर लगाए जाने हैं, जिसके लिए टेंडर कॉल किया जा रहा है। सतलुज वाटर प्रोजेक्ट से पहले ट्रायल के तौर पर सात हजार मीटर लगा रहे हैं।
-धर्मेंद्र गिल, एमडी पेयजल कंपनी