राजधानी शिमला की रिस्ट्रिक्टेड और सिल्ड सड़कों पर बिना परमिट वाहन दौड़ाए जाने पर प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
अदालत ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव शहरी विकास, प्रधान सचिव परिवहन, डीसी, एसपी शिमला, शिमला नगर निगम आयुक्त, विधानसभा सचिव और एचआरटीसी के एमडी को अदालत 24 नवंबर को अदालत में तलब किया है।
प्रशासन द्वारा दायर की रिपोर्ट को सही नहीं मानते हुए मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रतिवादियों को जवाबतलब किया है कि शिमला रोड यूजर एक्ट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभी तक क्या कार्रवाई की गई है। इस बारे में शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को अवगत करवाया जाए।
विधानसभा सचिव द्वारा विधायकों को जारी किए परमिट पर भी अदालत ने जानकारी तलब की है कि परमिट विधायकों के अलावा अन्य अधिकारियों के पक्ष में किस नियम के तहत जारी किए गए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा कि जो भी अधिकारी इन परमिटों को जारी करते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संबंधित वाहन उस व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर होना चाहिए और उस वाहन का दुरुपयोग न हो। अदालत ने इस मामले की सुनवाई 24 नवंबर को निर्धारित की है।