पूर्ण चंद्र ग्रहण का समय
भारतीय समयानुसार ग्रहण का प्रारंभ रात 9:57 बजे होगा। ग्रहण का मध्य काल रात 11:41 बजे और मोक्ष काल रात 1:27 बजे होगा। ग्रहण का स्पर्श, मध्य व मोक्ष संपूर्ण भारत में दृश्यमान रहेगा। ग्रहण अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलेशिया, एशिया, भारत महासागर, यूरोप और पूर्वी अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों से दिखाई देगा। भारत में, ग्रहण के सभी चरण, पूर्णता सहित पूरे देश में दिखाई देंगे।
सूतक काल का समय
ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है। इस बार सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से प्रारंभ होगा और पूरे ग्रहण काल तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान शास्त्रों के अनुसार देव-प्रतिमाओं का स्पर्श, पूजा-पाठ और हवन जैसे कार्य वर्जित माने गए हैं। हालांकि, जप और ध्यान करना इस समय कई गुना फलदायी होता है।
ग्रहण की अवधि 3.30 घंटे
चंद्र ग्रहण का स्पर्श 7 सितंबर को भारतीय समयनुसार रात 9:57 पर होगा। ग्रहण का अंत 1:27 बजे होगा। इस ग्रहण की पूर्णता 7 सितंबर को 11:00 पर प्रारंभ होगी तथा ग्रहण की पूर्णता का अंत 12:23 बजे पर होगा । ग्रहण की अवधि साढ़े तीन घंटे की होगी। ग्रहण के पूर्णता की अवधि 1 घंटा 23 मिनट की है। भारत में दृश्य अगला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को घटित होगा जोकि पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। भारत में दृश्य पिछला चंद्र ग्रहण 28 अक्तूबर 2023 को घटित हुआ था जोकि आंशिक
ग्रहण एक खगोलीय घटना
ग्रहण एक खगोलीय घटना है। चंद्र ग्रहण का असर केवल वैज्ञानिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को घटित होता है, जब पृथ्वी, सूर्य व चंद्रमा के बीच आ जाती है तथा ये तीनों एक सीधी रेखा में अवस्थित हो जाते हैं। पूर्ण चंद्र ग्रहण तब घटित होता है जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की प्रच्छाया से ढक जाता है। आंशिक चंद्र ग्रहण तब घटित होता है जब चंद्रमा का एक हिस्सा ही पृथ्वी की प्रच्छाया से ढक पाता है।