ऐसे में अब पीड़ित परिवार के पास एकमात्र रास्ता न्यायालय से डीएनए टेस्ट की अनुमति लेकर टेस्ट करवाना ही शेष रहा है। चुराह के एक व्यक्ति ने मेडिकल कॉलेज चंबा स्टाफ पर नवजात की अदला-बदली के आरोप लगाए थे। व्यक्ति ने बताया कि 28 मार्च को उसकी पत्नी ने मेडिकल कॉलेज चंबा में शिशु को जन्म दिया। इसी समय भरमौर से ताल्लुक रखने वाली एक महिला ने भी मेडिकल कॉलेज चंबा में नवजात को जन्म दिया। पीड़ित ने बताया कि उनका नवजात पूरी तरह स्वस्थ रहा। इतना ही नहीं, उनका कहना है कि उन्होंने अपने बच्चे की फोटो भी खींची हुई हैं। बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज चंबा में उनके नवजात की अदला-बदली कर दी गई है। इसकी शिकायत चिकित्सा अधीक्षक चंबा के पास पहुंची। इसमें जांच कमेटी गठित कर तीन दिनों में रिपोर्ट सौंपने के आदेश जारी हुए।
चिकित्सा अधीक्षक चंबा के पास पहुंची जांच रिपोर्ट से भी कुछ साफ नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं पीड़ित परिवार ने इस पर आपत्ति जताई है, जिसके बाद अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिजनों के डीएनए टेस्ट करवाने का निर्णय लिया गया है। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के पास मामला भेज दिया। पीड़ित परिवार की शिकायत पुलिस के महिला एवं बाल मित्र थाना में दी। इसके तहत अब सबसे बड़ी चुनौती पुलिस के समक्ष ये आ रही है कि बिना किसी आपराधिक मामला दर्ज किए डीएनए टेस्ट करवाना संभव नहीं हैं। इतना ही नहीं, एक परिवार और स्वास्थ्य विभाग बच्चों की अदला-बदली न होने की बात भी कह रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में अब पीड़ित परिवार को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है। न्यायालय से ही डीएनए टेस्ट करवाने की अनुमति के बाद वे अपने स्तर पर ये टेस्ट करवा कर इस मामले से पर्दा उठा सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज चंबा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विपन शर्मा ने बताया कि जांच रिपोर्ट से भी पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं हैं। लिहाजा, मामला पुलिस के पास भेज दिया गया है। अब डीएनए रिपोर्ट के आधार पर ही सब साफ होने की उम्मीद है।
पुलिस शिकायत की कर रही है जांच
थाना प्रभारी संजीव चौधरी ने बताया कि बिना आपराधिक मामला दर्ज किए पुलिस भी कुछ नहीं कर सकती है। मामला इतना अधिक पेचीदा हो रहा है कि एक परिजन और स्वास्थ्य विभाग नवजात के अदला-बदली से मना कर रहे हैं। बताया कि महिला एवं बाल मित्र थाना में पीड़ित परिवार की शिकायत पहुंची है। मामले की जांच जारी है।