केंद्र सरकार सिर्फ शुरुआती मंजूर बजट ही देगी।
हिमाचल में चार साल से अधिक समय से अधूरी पड़ी गांवों की सड़कों के निर्माण के लिए पूरा बजट देने से केंद्र सरकार ने साफ इंकार कर दिया है। यह हिमाचल के लिए एक बड़ा झटका है। इस नए पेच में प्रदेश की लगभग 250 सड़कें फंस गई हैं। केंद्र ने दो टूक निर्देश जारी किए हैं कि हिमाचल सरकार को इन लंबित सड़कों की मंजूर लागत से ज्यादा के अतिरिक्त खर्चे यानी स्पिल ओवर चार्जेस खुद उठाने होंगे। केंद्र सरकार सिर्फ शुरुआती मंजूर बजट ही देगी।
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लागू होने से पिछले कुछ समय तक कुल 2388 सड़क परियोजनाओं को मंजूर किया है। इनमें से 1928 सड़कों का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इनमें भी 460 सड़कों के प्रोजेक्ट अभी तक अधूरे हैं। लगभग
250 से अधिक सड़कें ऐसी हैं, जिन्हें बनाते हुए चार साल से अधिक समय हो गया है और ये पूरी नहीं हो पाई हैं। अनेक सड़कों का काम बीच में ही फंसा पड़ा है। कुछ का तो काम ही शुरू नहीं हो सका है। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण नरेंद्र चौहान ने कहा है कि दो दिन बाद नई दिल्ली में एक बैठक है, उसी में इस मसले पर चर्चा होगी।
फंस सकती हैं जई-सांबर-रिहाण जैसी कई सड़कें- केंद्र सरकार ने शिमला जिले की एक सड़क जई-सांबर-रिहाण के लिए शुरुआती दौर में करीब सात साल पहले चार करोड़ रुपये मंजूर किए थे। तीन साल पहले स्पिल ओवर चार्जेस जोड़कर इसकी लागत छह करोड़ हो गई। अब कुल लागत में लगभग एक करोड़ रुपये की बढ़ोतरी और मानी जा रही है।
यानी ये सड़क लगभग सात करोड़ रुपये खर्च कर ही बन पाएगी। ऐसे में केंद्र सरकार से शुरुआत में मंजूर बजट के अलावा अतिरिक्त खर्च खुद हिमाचल सरकार को उठाना पड़ेगा। यानी सड़क की लगभग आधी लागत हिमाचल सरकार को उठानी पड़ सकती है। यही स्थिति अन्य सड़कों के मामले में भी होगी।
नए वित्त वर्ष में सड़कों के लिए प्रदेश को 180 करोड़ देगा केंद्र- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब निर्धारित 90:10 के अनुपात में हिमाचल के लिए केंद्र सरकार इस वित्त वर्ष में कुल 180 करोड़ रुपये देगी। इसमें 20 करोड़ रुपये हिमाचल को खुद अपने खर्च करने होंगे। बाकी चार साल पुरानी लंबित सड़कों के लिए करोड़ों रुपये के स्पिल ओवर चार्जेस भी हिमाचल सरकार को खुद वहन करने होंगे।