पंचायतों को पंद्रह दिन में पैसा जारी नहीं किया तो उन्हें ब्याज भी दो। इससे यह समय पर खर्च हो सकेगा। इस चेतावनी के साथ केंद्र सरकार ने हिमाचल के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 180.81 करोड़ की ग्रांट जारी की है।
यह पैसा 14वें वित्तायोग की संस्तुति पर चालू वित्तीय वर्ष के विभिन्न कार्यों के लिए जारी किया है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के संयुक्त सचिव सुभाष चंद्र मीणा ने हिमाचल सरकार के वित्त, पंचायतीराज और ग्रामीण विकास विभाग के सचिवों को पत्र भेजकर 180.81 करोड़ की आर्थिक मदद जारी करने की सूचना दी है।
हिमाचल और गुजरात सरकारों के संबंधित सचिवों के लिए एक संयुक्त पत्र भेजा गया है। इसमें हिमाचल और गुजरात दोनों राज्यों के लिए 1043.49 करोड़ जारी करने का जानकारी दी गई है। गुजरात सरकार को 862.68 करोड़ दिए गए हैं।
यह ग्रांट तय फार्मूले के आधार पर ही पंचायतों को देनी होगी। फार्मूले के अभाव में इसे वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर इसे जनसंख्या और क्षेत्र के आकार को ध्यान में रखकर आवंटित किया जाएगा। जनसंख्या और क्षेत्र के आकार में इसे 90:10 प्रतिशत के अनुपात के तय फार्मूले से बांटा जाएगा।
इस सूचना के मिलने के बाद राज्य अगर पंद्रह दिन के भीतर इसका बंटवारा नहीं करता है तो इसे देरी के दिनोें के हिसाब से ब्याज भी देना होगा। इसे भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से तय ब्याज दरों के अनुसार देना होगा।