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शिमला को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए मिलेंगे सिर्फ पांच माह

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शिमला। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत राजधानी को स्मार्ट बनाने के प्रोजेक्ट अब अगले पांच महीने के भीतर धरातल पर उतारने होंगे। इसके बाद इस मिशन के तहत किसी भी तरह के नए कामों को मंजूरी नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं।
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शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को भी इस बारे में लिखित पत्र मिल चुका है। इसके अनुसार 31 मार्च 2022 तक इस मिशन को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। स्मार्ट सिटी के अनुसार शहर में अभी इस मिशन के तहत जो काम चल रहे हैं या फिर जिनके टेंडर हो चुके हैं, उनके काम 31 मार्च 2022 के बाद भी जारी रह सकते हैं। लेकिन 31 मार्च के बाद किसी भी नए काम के ऑर्डर या टेंडर जारी नहीं हो पाएंगे। शिमला शहर में अभी कई बड़े प्रोजेक्ट क्लीयरेंस के चलते टेंडर प्रक्रिया में ही फंसे हैं। ऐसे में इनका काम अवार्ड करने और काम शुरू करने के लिए शिमला नगर निगम के पास अब सिर्फ पांच महीने बचे हैं।
यदि इस दौरान काम शुरू नहीं हुआ तो ये सपने ही रह जाएंगे। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शिमला शहर के लिए 2905 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट चयनित किए गए थे। इनमें से अब तक करीब चार सौ करोड़ के प्रोजेक्टों पर ही काम चल रहा है। बाकी छह सौ करोड़ की योजनाएं बन रही हैं। इस तरह शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट एक हजार करोड़ में ही सिमट सकता है। हालांकि, निगम को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट को एक्सटेंशन भी मिल सकती है।
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इन प्रोजेक्टों का काम जारी, हो सकेंगे पूरे
शहर में सर्कुलर रोड को चौड़ा करने, फुटपाथ बनाने, संजौली आईजीएमसी सड़क पर स्मार्ट फुटपाथ, सरकारी भवनों पर सोलर पैनल, लक्कड़ बाजार से रिज मैदान एस्केलेटर और लिफ्ट, विकासनगर में लिफ्ट प्रोजेक्ट, लिफ्ट के पास केबल ओवरब्रिज, कसुम्पटी, छोटा शिमला में व्यावसायिक परिसर, शहर में बुक कैफे, चौड़ा मैदान में बुक कैफे, बालूगंज में कामना देवी सड़क, व्यावसायिक परिसर, कार्टरोड पर व्यावसायिक परिसर, रिज मैदान और मरीना के पास म्यूजिकल फाउंटेन, आईजीएमसी मल्टी स्टोरी पार्किंग, नगर निगम की प्रीफेब दुकानें जैसे प्रोजेक्टों का काम चल रहा है। इनका काम जारी रहेगा। विकासनगर में पार्किंग और ढली में डबललेन टनल के टेंडर होने से इनका निर्माण होना तय है।
फ्लाईओवर, सर्विलेंस सेंटर, एस्केलेटर रह जाएंगे सपने
सिटी सर्विलेंस प्लान के तहत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने, कॉम्बरमेयर और लिफ्ट नाले का चैनलाइजेशन, जाखू मंदिर को एस्केलेटर, सब्जी मंडी मैदान पर नगर निगम का नया कार्यालय बनाने जैसे प्रोजेक्टों पर संकट मंडरा गया है। जमीन और फॉरेस्ट क्लीयरेंस के चलते इनके टेंडर लटके पड़े हैं। रिज मैदान को बचाने और छोटा शिमला में वॉकवे बनाने के प्रोजेक्ट का टेंडर भी लटका है। खलीनी में फ्लाईओवर, कसुम्पटी में स्टेक पार्किंग, ऑकलैंड लक्कड़ बाजार एस्केलेटर जैसे प्रोजेक्ट तभी बनेंगे जब पांच महीने में इनके टेंडर या ऑर्डर हो पाएंगे।
इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से पत्र आया है। इसमें 31 मार्च तक स्मार्ट सिटी के कामों के आर्डर करने के दिशा-निर्देश हैं। बाकी अभी पत्र को स्टडी किया जा रहा है।
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-मनमोहन शर्मा, प्रबंध निदेशक शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
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