प्रदेश में स्कूली बच्चों को गुणात्मक शिक्षा देने और शैक्षणिक गतिविधियों का स्तर सुधारने को केंद्र ने 838 करोड़ का बजट मंजूर किया है। पिछले साल की तुलना में इस साल सवा सौ करोड़ का अधिक बजट मिला है। वीरवार को नई दिल्ली में हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में प्रदेश को 838 करोड़ का बजट मंजूर किया गया। बैठक की अध्यक्षता सचिव स्कूल शिक्षा बोर्ड भारत सरकार ने की।
प्रदेश से परियोजना निदेशक घनश्याम चंद बैठक में मौजूद रहे। इस दौरान सर्व शिक्षा अभियान को 428 करोड़ और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान को 410 करोड़ का बजट मंजूर हुआ। बजट का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी, जबकि 10 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकार की होगी। सरकार ने साल 2016-17 के लिए केंद्र से 1451 करोड़ बजट मांगा था। साल 2015-16 में हिमाचल को 700 करोड़ का बजट मिला था।
इस बजट को पहली से जमा दो कक्षा तक विभिन्न गतिविधियों पर खर्चा जाएगा। एसएसए के तहत निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए हर जिले में सरकार तीन-तीन लैब स्कूल खोलेगी। इनमें निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। फिजिकल एजूकेशन, पर्यावरण शिक्षा पर फोकस रहेगा। विज्ञान और गणित विषय में बच्चों की रुचि बढ़ाने को अधिक प्रयास किए जाएंगे। रीडिंग और राइटिंग पर जोर दिया जाएगा।
बीते एक साल में अपग्रेड हुए 317 स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू होगी। इनमें आईसीटी लैब गठित की जाएंगी। वोकेशनल शिक्षा को नवीं से शुरू किया जाएगा। स्कूलों को ई गवर्नेंस से जोड़ा जाएगा। कलस्टर स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। ऑनलाइन प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भी है। गणित और विज्ञान विषय में बच्चों की रुचि बढ़ाने पर जोर रहेगा। इन विषयों को आसानी से समझाने के लिए तरीके तलाशे जाएंगे।
प्रदेश में शुरू होंगे प्रयास, प्रेरणा, उड़ान प्रोजेक्ट
सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के तीन जिलों में विशेष अभियान चलाए गए हैं। प्रेरणा अभियान हमीरपुर, प्रयास अभियान बिलासपुर और उड़ान अभियान मंडी में चलाए जा रहे हैं। 2016-17 में इन्हें अन्य जिलों में चलाया जाएगा। उड़ान अभियान मंडी में पहली से पांचवीं तक चलाया जा रहा है। इसमें बच्चों के पढ़ने, लिखने, बोलने पर ध्यान दिया जाता है।
बिलासपुर में चलाए प्रयास अभियान में छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों में गणित और विज्ञान के प्रति रुचि पैदा की जाती है। हमीरपुर में प्रेरणा अभियान के तहत पहली से आठवीं के बच्चों की भाषा, न्यूमरेसी पर काम किया जा रहा है। क्लासरूम में बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करना है। इसका प्र्रशिक्षण शिक्षकों को दिया जाता है।