सीबीएसई की डायरेक्टर (एकडेमिक्स, रिसर्च एंड ट्रेनिंग) डा. साधना पाराशर की ओर से सभी स्कूलों को जारी गाइडलाइंस में बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की गई है। गाइडलाइंस के अनुसार टूर पर जाने वाले बच्चों को सुरक्षा आई-कार्ड जारी करने होंगे।
इसके अलावा बच्चों के पर्सनल ब्यौरे का एक डाटाबेस टूर में साथ लेकर जाना होगा। टूर के साथ एक सीनियर टीचर और छात्राओं की सूरत में महिला टीचर का होना जरूरी किया है। टूर पर जाने से पहले बच्चों और अभिभावकों को ब्रीफिंग करनी होगी।
टूर ले जाने वाले शिक्षकों को फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी फोन नंबर, टार्च जैसी चीजें रखनी होंगी। गाइडलाइंस में कहा है कि हो सके तो स्कूल प्रबंधन टूर पर जाने वाले सभी सदस्यों का यात्रा एवं स्वास्थ्य बीमा कराए।
अनजाने में गई थी स्टूडेंट्स की जान
मंडी के लारजी में मनाली भ्रमण पर जा रहे हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 बच्चों की जान अनजाने में ही चली गई थी। बीते आठ जून को मनाली जा रहे ये बच्चे मंडी के लारजी के पास फोटो खींचने के लिए ब्यास में चले गए थे।
इस बीच अचानक लारजी डैम से पानी छोड़ने के कारण ये बच्चे ब्यास में बह गए। बहुचर्चित इस हादसे में बहे इन स्टूडेंट्स के शव कई दिनों बाद मिले। यदि इन्हें संभावित खतरे का पता होता, तो ये जानें नहीं जाती।
डीएम से परमिशन लेना अनिवार्य
डैम साइटों, बिजली प्रोजेक्टों, नदियों और समुद्र किनारे स्कूली बच्चों के टूर अब वहां के डीएम को पूछकर होंगे। टूर ले जाने से पहले स्कूल प्रबंधन संबंधित क्षेत्र की आबोहवा और मौसम पूर्वानुमान की रिपोर्ट लेगा।
दस से ज्यादा बच्चे होने पर स्थानीय गाइड को साथ लेना जरूरी होगा। टूर पर ले जाने से पहले हर बच्चे के अभिभावक से स्कूल प्रबंधन को लिखित में अनुमति लेनी होगी। मंडी में इसी साल जून में हुए लारजी हादसे से सबक लेते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने देश भर में अपने स्कूलों को शैक्षणिक टूर के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
लारजी में हैदराबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के 24 छात्र ब्यास नदी में बह गए थे।