30 स्कूलों में अतिरिक्त टीचिंग पदों को सृजित कर भरा जाएगा
सरकार की अधिसूचना के अनुसार प्रिंसिपल स्कीम में बताए गए मानदंड के अनुसार 19 जनवरी 2026 की तारीख वाले पत्र के जरिये मंजूर किए गए 30 स्कूलों में पहले से मंजूर पदों के अलावा अतिरिक्त टीचिंग पदों का सृजन कर भरा जाएगा। पदों की संख्या विभाग की ओर से तय की जाएगी और सरकार की मंजूरी के बाद अलग से सूचित की जाएगी। इन 130 स्कूलों में से प्रत्येक में एक-एक स्पेशल एजुकेटर के 130 पदों का सृजन और जॉब ट्रेनी के रूप में सीधी भर्ती से उन्हें भरा जाएगा। 130 स्कूलों में चौकीदार और स्वीपर के एक-एक पद का सृजन और जॉब ट्रेनी के रूप में भरा जाएगा।
अंग्रेजी और गणित के 400-400 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, ये रहेंगी शर्तें
सीबीएसई संबद्ध स्कूल उत्कृष्टता योजना में राज्य चयन आयोग के माध्यम से 400 अंग्रेजी शिक्षकों और 400 गणित शिक्षकों की नियुक्ति निश्चित मानदेय/समेकित राशि के साथ अस्थायी आधार पर पांच साल की अवधि के लिए और 30,000 के निश्चित मासिक मानदेय पर साल में 10 महीने के लिए देय होगा। विभाग इन शिक्षकों की ओर से पढ़ाए जाने वाले एक विशेष पाठ्यक्रम को तैयार करेगा ताकि अंग्रेजी और गणित में विद्यार्थियों की दक्षता और सीखने के स्तर में सुधार किया जा सके। यह पाठ्यक्रम इन विषयों के मौजूदा पाठ्यक्रम के अतिरिक्त होगा। विभाग विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार इन 130 स्कूलों में इन शिक्षकों को तैनात कर सकता है और इन शिक्षकों को आवश्यकतानुसार अन्य सरकारी स्कूलों में भी लगाया जा सकता है।
इन श्रेणी के शिक्षकों, कर्मियों को आउटसोर्स पर भरा जाएगा
वहीं योग शिक्षक, परामर्शदाता सह कल्याण शिक्षक, कैटरिंग सुपरवाइजर व आया की सेवाओं को आउटसोर्सिंग के आधार पर (इन 130 स्कूलों में से प्रत्येक में एक) नियुक्त किया जाएगा। कार्मिक विभाग की ओर से जारी की जाने वाली सामान्य पीटी-एमटीडब्ल्यू नीति के तहत 390 अंशकालिक मल्टी टास्क वर्क(प्रत्येक 130 स्कूलों में तीन) की नियुक्ति की जाएगी। शिक्षा विभाग आवश्यकता अनुसार इन 130 स्कूलों में विभिन्न श्रेणियों के अतिरिक्त शिक्षण पदों का सृजन कर सकता है, जो इन पदों के अतिरिक्त होंगे। इन स्कूलों में बनाए गए पदों को हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के लिए शिक्षकों के सब काडर बनाने की सब स्कीम के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार भरा जाएगा। स्कीम में बताई गई संख्या के अनुसार नॉन-टीचिंग स्टाफ की जरूरत, यानी क्लर्क/ जेओए आई, सीनियर असिस्टेंट, सुपरिटेंडेंट ग्रेड-1 और 2, विभाग के अंदर पदों के उन्नयन और युक्तिकरण के माध्यम पदों को बनाकर और भरकर पूरी की जाएगी।
सीबीएसई स्कूलों के लिए परीक्षा से न हो शिक्षकों का चयन : वीरेंद्र
राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने के निर्णय का स्वागत करते हुए इन स्कूलों में शिक्षकों का चयन परीक्षा के माध्यम से न करवाने की मांग की है। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भेजे पत्र में संघ ने कहा है कि नई व्यवस्था को बिना किसी भ्रम और असंतोष के सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सभी हितधारकों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। चौहान ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में तैनाती के लिए योग्य और लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों की दक्षता जांचने के लिए किसी भी प्रकार की परीक्षा या टेस्ट न लिया जाए। जो शिक्षक पहले से सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत हैं, उन्हें कम से कम एक वर्ष का समय दिया जाए, ताकि उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन बोर्ड परीक्षा परिणामों के आधार पर किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की कार्यक्षमता का आकलन केवल परीक्षा परिणामों के आधार पर किया जाए तथा सभी रिक्त पदों को 100 प्रतिशत भरा जाए। साथ ही सीबीएसई और हिमाचल बोर्ड के बीच शिक्षकों के स्थानांतरण की सुविधा उनकी इच्छा के अनुसार जारी रखी जाए। संघ अध्यक्ष ने कहा कि बालक और बालिका विद्यालयों का अनावश्यक विलय न किया जाए। इसके बजाय एक स्कूल को सीबीएसई और दूसरे को हिमाचल बोर्ड के अंतर्गत सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने मांग की कि प्रधानाचार्य और शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए सीबीएसई मानकों के अनुसार नामित उप-प्रधानाचार्य का एक पद सृजित किया जाए। वीरेंद्र चौहान ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई और हिमाचल बोर्ड की फीस संरचना में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न की जाए।