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CBI रेड: तो क्या रिश्वत के पैसों से केस लड़ रहे हैं मुख्यमंत्री वीरभद्र

Wed, 31 May 2017 03:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/बद्दी (सोलन)
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सीबाआई के जाल में पांच लाख रिश्वत लेते फंसे जाइंट डायरेक्टर की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग से बड़ा खुलासा हुआ है। रिश्वत की डील के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी की बातचीत की रिकॉर्डिगिं से खुलासा हुआ है कि संयुक्त निदेशक को दिल्ली के एक वकील तक बतौर फीस के 35 लाख रुपये पहुंचाने थे, जो हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का केस लड़ रहा है। 
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सीबीआई के सूत्रों के अनुसार संयुक्त निदेशक ने इसके लिए वीरभद्र के निजी सचिव का फोन आने की बात भी कही थी और कहा कि वह चाहे तो उनकी बात भी उससे करा सकते हैं। आपकों बता दें कि हिमाचल के जिला सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में तैनात उद्योग विभाग के जाइंट डायरेक्टर तिलकराज शर्मा और उसके एक सहयोगी को सीबीआई ने चंडीगढ़ में पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यालय से जुड़े तार

सीबीआई की प्रारंभिक जांच में मामले के तार नई दिल्ली स्थित हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यालय से जुड़ते दिख रहे हैं। रिकार्डिगिं में यह तथ्य सामने आया है।

तिलकराज ने शिकायतकर्ता से कहा था कि पहली किश्त के पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दिल्ली कार्यालय में तैनात निजी सचिव पीएस रघुवंशी को जाएंगे। बता दें कि सीबीआई ने पूरी प्लानिंग के तहत तिलकराज को रंगे हाथ पकड़ा है।
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रिश्वत कांड: धूमल ने मांगा मुख्यमंत्री का इस्तीफा

र्व मुख्यमंत्री प्रेम धूमल और सतपाल सिंह सत्ती ने सीबीआई के प्रदेश उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक रिश्वत कांड में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता के आरोपों को बेहद गंभीर करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का मुखिया भ्रष्टाचार के आरोपों पर जमानत पर चल रहा हो, वहां के कर्मचारियों का भ्रष्टाचार में संलिप्त होने साथ मामले के तार सीएम कार्यालय से जुड़ने का मसला अतिगंभीर है। ऐसे स्थिति में सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। 

मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पैसे लेकर सब्सिडी रिलीज करना कांग्रेस सरकार की संस्कृति का द्योतक है। उद्योग की लगातार शिकायतें थी कि उन्हें वर्तमान सरकार लूट रही है। बावजूद इसके उद्योगपतियों की आवाजों को दबाया जा रहा था। एक के बाद एक करके उद्योगपति प्रदेश छोड़ कर जा रहे हैं। 

पिछले चार वर्षों में कोई नया उद्योग हिमाचल प्रदेश में नहीं लगा, इसकी वजह मंत्रियों और अधिकारियों की सरेआम लूट थी। ऊना और पंडोगा में जमीनें खाली पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जिस संयुक्त निदेशक गिरफ्तार किया है वो केवल मोहरा है। डायरेक्टर की स्वीकृति से स्पष्ट हो गया है कि इसकी जड़ में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी संलिप्त हैं। 

इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने के पश्चात भाजपा के आरोपों की भी पुष्टि हो गई है। भाजपा नेताओं ने कहा कि केवल एक यही मामला नहीं है बल्कि इसके अतिरिक्त कुछ समय पूर्व एक अधिकारी का ड्रग्स रैकेट में संलिप्त होना इस बात का संकेत है कि भ्रष्टाचार को सरकारी स्तर पर संरक्षण मिला हुआ है। भाजपा का यह मानना है कि कांग्रेस को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं रह गया है इसलिए सरकार को बर्खास्त किया जाना आवश्यक है। 
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