कानून के जानकारों के मुताबिक सीआरपीसी की धारा 219 ट्रायल से संबंधित है, जबकि किसी भी जांच एजेंसी पर यह प्रभावी नहीं होती है। इसके मुताबिक अगर किसी भी शख्स ने एक साल की समय अवधि में तीन से अधिक एक ही तरह के अपराध किए हैं तो उसकी एक ही ट्रायल में जांच नहीं हो सकती है। इसके लिए अलग-अलग मामले दर्ज करने होंगे।
बैंक में हुए फर्जीवाड़े में भी तीन से अधिक बार लोन आवंटित किए गए थे। ऐसी स्थिति में जांच एजेंसी एक से अधिक केस दर्ज कर सकती थी, मगर कोई भी जांच एजेंसी इसका हवाला देकर केस दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकती है। ऐसे में सीबीआई के केस दर्ज नहीं करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कानूनी सलाह ले रहा बैंक
सीबीआई से मामला वापस आने के बाद हिमाचल ग्रामीण बैंक प्रबंधन अब मामले में कानूनी सलाह ले रहा है। इसके बाद ही मामले में आगामी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, बैंक प्रबंधन इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहा है।