सरकाघाट के हटली क्षेत्र के कैप्टन ज्ञानचंद (84) का शनिवार दोपहर हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। बलद्वाड़ा के कारनी गांव निवासी कैप्टन ज्ञानचंद ने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में भाग लिया था। भारतीय सेना के 18 डोगरा रेजिमेंट में 32 वर्ष सेवाएं देने के बाद वर्ष 1989 में वह सेवानिवृत्त हुए।
देश की सरहद की रक्षा करते हुए तीन युद्धों में भाग लेने वाले हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट के हटली क्षेत्र के कैप्टन ज्ञानचंद (84) का शनिवार दोपहर हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। बलद्वाड़ा के कारनी गांव निवासी कैप्टन ज्ञानचंद ने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में भाग लिया था। भारतीय सेना के 18 डोगरा रेजिमेंट में 32 वर्ष सेवाएं देने के बाद वर्ष 1989 में वह सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद भी वह पूर्व सैनिकों के कल्याण कार्यों में सक्रिय रहे। ऑनरेरी कमीशन अफसर कैप्टन ज्ञानचंद को देश के महामहिम राष्ट्रपति ने भी सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मान दिया था। शनिवार दोपहर दो बजे वह बलद्वाड़ा में अपने बेटे को स्कूटी पर खाना देने गए थे।
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वापसी पर जैसे ही वह अपने घर के पास पहुंचे तो उन्हे हार्ट अटैक आ गया। करीब दस मिनट बाद लोगों ने उन्हें सड़क पर पड़े देखा और बलद्वाड़ा अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कैप्टन ज्ञानचंद को बलद्वाड़ा श्मशानघाट में भारी संख्या में पूर्व सैनिकों और स्थानीय जनता ने अंतिम विदाई दी। उनके निधन पर सरकाघाट के विधायक कर्नल इंद्र सिंह, पूर्व मंत्री रंगीला राम राव, दिलीप ठाकुर, चंद्र मोहन शर्मा आदि ने दुख जताया है।