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क्लास में प्रताड़ित करती है टीचर, छात्रों ने किया कक्षाओं का बहिष्कार

Thu, 22 Sep 2016 07:02 PM IST
बलविंद्र सोढ़ी/अमर उजाला, सुंदरनगर (मंडी)
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विकलांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय  एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के अधीन चल रहे संयुक्त क्षेत्रीय केंद्र में वाणी व श्रवण का डिप्लोमा करने वाले प्रथम वर्ष के 30 विद्यार्थियों ने जिसमें 10 मूक बधिर भी शामिल है ने महिला सहायक प्रोफेसर पर मानसिक शोषण व कक्षा में जलील करने का आरोप लगाया है।
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सहायक प्रोफेसर के रवैये के खिलाफ विद्यार्थियों ने पिछले एक सप्ताह से कक्षा का भी बहिष्कार कर रखा है। विद्यार्थियों ने संस्थान के प्रभारी अधिकारी को 9 सितंबर को इस बारे लिखित शिकायत दी थी। जिस पर दस दिन बाद भी कोई कार्यवाई ना होने पर विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों ने संस्थान में हल्ला बोला तो प्रभारी ने बैठक बुला कर दोनों पक्षों को सुना।

जहां विद्यार्थियों ने साफ कर दिया कि जब तक सहायक प्रोफेसर को हटाया नहीं जाता तब तक वह कक्षाओं का बहिष्कार जारी रखेंगे अन्यथा वह सभी कोर्स को छोडने पर मजबूर होंगे। सुंदरनगर स्थित केंद्रीय विकलांग पुनर्वास केंद्र जिसे दो वर्ष पहले देश के सभी 10 केंद्रों में से सर्वश्रेष्ठ का पुरस्कार मिल चुका है।
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एक सहायक प्रोफेसर के रवैये के चलते विवादों में आ गया है। केंद्र का मुख्य उद्देश्य मानव संसाधन के तहत स्पेशल एजुकेटर तैयार करना है जो देश में दिव्यांगों को पढ़ाने व उनकी समस्याओं का निवारण कर सके। ऐसे संस्थान में इस तरह की घटना से उसकी छवि पर भी असर पड़ रहा है।

संस्थान में वाणी व श्रवण का डिप्लोमा कर रहे प्रथम वर्ष के 30 विद्यार्थियों, जिसमें 10 विद्यार्थी मूक बधिर भी शामिल है का कहना है कि रोजाना क्लास में  सहायक प्रोफेसर असभ्य व असंसदीय भाषा का प्रयोग करती है। उनका पाठ्यक्रम जो हिंदी व अंग्रेजी में है को केवल वह अंग्रेजी में ही पढ़ाती है। क्योंकि वह हिमाचल बोर्ड व उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड के छात्र है उन्हें अंगेजी का ज्ञान कम है।

सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी में पढ़ाती है जिसके कारण वह विषय को सही तरीके से नहीं समझ पाते हैं। संस्थान में पहली बार 10 मूक बधिर विद्यार्थी भी वाणी व श्रवण की पढ़ाई कर रहे हैं वह बोल व सुन नहीं सकते इसलिए उनके लिए स्पेशल साइन लैंग्वेज इंटर प्रेटर नियुक्त किया गया है जो प्रोफेसर की बातों को इशारों से उन्हें समझाता है। उन्होंने संस्थान के प्रभारी अधिकारी को बताया है कि रोजाना कक्षा में पहुंचने पर सबसे पहले सहायक  प्रोफेसर उन्हें उससे चार फीट दूर बैठने को कहती हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि क्या वह इंसान नहीं हैं जो प्रोफेसर को उनसे डर लगता है। उन्होंने साफ कहा है कि ऐसे प्रोफेसर के पास पढ़ने से तो वह घर बैठना पसंद करेंगे।

केंद्रीय विकलांग पुनर्वास केंद्र के प्रभारी अधिकारी मनजीत सैनी ने वाणी व श्रवण का डिप्लोमा कर रहे प्रथम वर्ष के सभी 30 विद्यार्थियों की ओर से सहायक प्रोफेसर के व्यवहार की शिकायत मिली है। जिसकी गंभीरता को देखते हुए मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा कक्षाओं का बहिष्कार करने की पुष्टि करते हुए कहा कि विवाद को सुलझाने के प्रयास किए जा रहे है।
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