कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि कि वैट, आबकारी शुल्क, बिक्री कर और जीएसटी की समय पर उगाही न होने अथवा कम वसूली से सरकार को 1159 मामलों में 541.95 करोड़ का नुकसान हुआ है। शराब ठेकेदारों ने 19,13,244 प्रूफ लीटर कम शराब उठाई। इस वजह से सरकार को 58.50 करोड़ के राजस्व से वंचित रहना पड़ा।
आबकारी एवं कराधान विभाग के लेखों की जांच के बाद कैग ने खुलासा किया है कि 36 लाइसेंसधारकों के कम शराब उठाने या फर्जी चालान प्रस्तुत कर शराब उठाने से खजाने को करीब 34 करोड़ का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि तय मात्रा से कम शराब उठाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ भी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अफसरों के आंखें मूंदें रखने की वजह से सरकार को नुकसान हुुआ। रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब अफसरों पर सरकार कार्रवाई भी कर सकती है।
राज्य बिजली बोर्ड की माली हालत में कुछ सुधार आया है। कैग रिपोर्ट के अनुसार बोर्ड के टर्नओवर में वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2019-20 में 286 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017-18 में बिजली बोर्ड का टर्न ओवर 3342.62 करोड़ रुपये था। 2019-20 में यह बढ़कर 3629.19 करोड़ रुपये हो गया है।
हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा नीति में किए गए बदलाव के चलते यह सुधार आया है। कैग रिपोर्ट के अनुसार भारतीय लेखांकन मानक के तहत समायोजन के बाद प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के लाभ में 0.54 करोड़ रुपये की वृद्धि और बिजली बोर्ड की हानियों में 67.23 करोड़ रुपये की वृद्धि पाई गई।