हिमाचल प्रदेश के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव के लिए बतौर निर्दलीय उतरे पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा के पुत्र चेतन बरागटा को भाजपा ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। भाजपा नेताओं की तमाम कोशिशों के बावजूद चेतन मैदान से नहीं हटे। नामांकन वापसी के अंतिम दिन बुधवार को नाटकीय अंदाज में वह अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर गायब रहे, जबकि भाजपा नेता उनको तलाश करते रहे। शाम को बयान जारी कर बरागटा ने कहा कि जुब्बल-कोटखाई की जनता के दबाव के चलते उन्होंने नामांकन वापस नहीं लिया। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने भाजपा आईटी विभाग के प्रदेश संयोजक चेतन बरागटा को तुरंत प्रभाव से छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
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भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी नीलक सरैईक के विरुद्ध निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में प्रचार करने पर उनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई है। यह जानकारी भाजपा के कार्यालय सचिव प्यार सिंह ने दी है। बताया जा रहा है कि मंगलवार शाम 5 बजे से ही उनका मोबाइल बंद था। बुधवार सुबह 8:15 बजे उन्होंने किसी सेब के बगीचे से 40 सेकंड का एक वीडियो अपने फेसबुक पेज डाला, जिसमें उन्होंने लोगों से चुनाव में अपना आशीर्वाद मांगा और सभी को दुर्गाष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद फिर उनके दोनों मोबाइल फोन नंबर बंद हो गए। शाम को जैसे ही नामांकन वापसी का समय खत्म हुआ, वह समर्थकों के साथ अपने घर लौटे।
सेब मिला चुनाव चिह्न, लगाएगा बेड़ा पार : चेतन
चेतन बरागटा को चुनाव चिह्न सेब मिला है। मंत्री सुरेश भारद्वाज की टिप्पणी पर बरागटा ने कहा कि मान-सम्मान जनता देती है। जनता के आशीर्वाद से ही वह चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सेब चुनाव चिह्न मिला है। यही चिह्न उनका बेड़ा पार लगाएगा। उनके पिता नरेंद्र बरागटा भी सारी उम्र सेब उत्पादकों के हित में ही लड़ाई लड़ते रहे। बरागटा ने कहा कि वह छह बजे महासू से निकले, उसके बाद दरकोटी पंचायत गए। जब दरकोटी पंचायत में थे तो वहां सिग्नल नहीं होता है। ऐसे मेें लोगों को लगा होगा कि वह कहीं गायब हो गए हैं।