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उपचुनाव: देश के प्रथम मतदाता श्याम सरण नेगी ने 33वीं बार किया मतदान, बूथ पर हुआ भव्य स्वागत

Sat, 30 Oct 2021 05:46 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

देश के पहले मतदाता श्याम सरण नेगी को उनके घर कल्पा से सरकारी वाहन में सम्मानपूर्वक बूथ नंबर 51 पर लाया गया। इस दौरान उनके पोता और पोती भी साथ रहे। जिला निर्वाचन अधिकारी अपूर्व देवगन सहित प्रशासन की ओर से रेड कारपेट बिछाकर और किन्नौरी वेशभूषा में पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ किन्नौरी टोपी और मफलर पहनाकर उनका स्वागत किया गया।
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देश के पहले मतदाता श्याम सरण नेगी। - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर से संबंध रखने वाले स्वतंत्र भारत के प्रथम मतदाता 104 वर्षीय श्याम सरण नेगी ने मंडी संसदीय सीट के उपचुनाव के लिए शनिवार को अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर मजबूत लोकतंत्र का संदेश दिया। उन्होंने अपनी तीन पीढ़ियों के साथ आदर्श मतदान केंद्र कल्पा-51 में दोपहर 1:30 बजे मतदान किया। इस दौरान उनकी पौत्री मनीषा और पौत्र आकाश ने प्रथम बार मतदान किया। जिला प्रशासन ने नेगी का मतदान केंद्र पहुंचने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ रेड कारपेट बिछाकर भव्य स्वागत किया।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने नेगी को टोपी एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। जिला प्रशासन ने नेगी को मतदान केंद्र तक लाने व घर छोड़ने के लिए विशेष प्रबंध किए थे। मतदान के बाद नेगी ने बताया कि उन्होंने स्वतंत्र भारत में आज तक हुए सभी चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। उन्होंने सभी देशवासियों से लोकतंत्र की मजबूती के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का आग्रह भी किया। 

 
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श्याम सरण नेगी। - फोटो : अमर उजाला
संसदीय चुनाव के लिए यह उनका 18वां मतदान था। जबकि आजादी के बाद से अब तक सभी चुनावों में 33वां वोट था। एक जुलाई, 1917 को कल्पा में जन्में श्याम सरण नेगी ने पहला वोट 25 अक्तूबर, 1951 को ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बाद हुए पहले चुनाव में डाला था। कल्पा जनजातीय जिले का हिस्सा है। यहां बर्फबारी होने से पहले ही मतदान प्रक्रिया हो गई थी। श्याम सरण नेगी ने सबसे पहले वोट डाला था। 
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श्याम सरण नेगी। - फोटो : अमर उजाला
उम्र ज्यादा होने की वजह से 10वीं कक्षा में नहीं मिला था प्रवेश
 श्याम सरण नेगी का जन्म जुलाई 1917 को किन्नौर के कल्पा में हुआ। 10 साल की उम्र में स्कूल गए नेगी की पांचवीं तक की पढ़ाई कल्पा में हुई। इसके बाद पढ़ाई के लिए रामपुर गए। रामपुर जाने के लिए पैदल तीन दिन लगते थे। नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई रामपुर में ही की। उम्र ज्यादा होने से 10वीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिला। मास्टर श्याम सरण नेगी ने शुरू में 1940 से 1946 तक वन विभाग में वन गार्ड की नौकरी की। उसके बाद शिक्षा विभाग में चले गए और कल्पा लोअर मिडल स्कूल में अध्यापक बने। 

 

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श्याम सरण नेगी। - फोटो : अमर उजाला
इस तरह बने थे देश के पहले मतदाता
देश में फरवरी 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ, लेकिन किन्नौर में भारी हिमपात के चलते पांच महीने पहले सितंबर 1951 में ही चुनाव हो गए। पहले चुनाव के समय श्याम सरण नेगी किन्नौर के मूरंग स्कूल में अध्यापक थे और चुनाव में उनकी ड्यूटी लगी थी। उन्हें वोट देने का भी शौक था। उनकी ड्यूटी शौंगठोंग से मूरंग तक थी, जबकि वोट कल्पा में था।
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श्याम सरण नेगी। - फोटो : अमर उजाला
इसलिए उन्होंने सुबह वोट देकर ड्यूटी पर जाने की इजाजत मांगी। वह सुबह-सुबह मतदान स्थल पर पहुंच गए। 6:15 बजे मतदान ड्यूटी पार्टी पहुंची। नेगी ने जल्दी मतदान करवाने का निवेदन किया। मतदान पार्टी ने रजिस्टर खोलकर उन्हें पर्ची दी। मतदान करते ही इतिहास बन गया और मास्टर श्याम सरण नेगी आजाद भारत के पहले मतदाता बन गए।
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