औसत आठ हजार फीट की ऊंचाई पर होने वाला किन्नौरी सेब लंबे समय तक खराब नहीं होता है। यानी इसे लंबे समय तक इसे स्टोर किया जा सकता है। दूसरे सेब की अपेक्षा यह ज्यादा रसीला और मीठा होता है। लाल रंग के इस सेब का आकार भी बड़ा होता है। इसमें पौष्टिक तत्व ज्यादा होते हैं।
दो दशक से किन्नौरी सेब उत्पादन का रिकॉर्ड
वर्ष पेटियों की पैदावार
1998 11 लाख 87 हजार 209
1999 10 लाख 96 हजार 662
2000 8 लाख 96 हजार 539
2001 9 लाख 14 हजार 955
2002 12 लाख 40 हजार 944
2003 16 लाख 29 हजार 244
2004 16 लाख 64 हजार 164
2005 18 लाख 13 हजार 731
2006 18 लाख 32 हजार 576
2007 19 लाख 43 हजार 376
2008 24 लाख 82 हजार 550
2009 18 लाख 21 हजार 639
2010 28 लाख 70 हजार 141
2011 23 लाख 94 हजार 799
2012 23 लाख 38 हजार 927
2013 24 लाख 36 हजार 976
2014 24 लाख 36 हजार 976
2015 26 लाख 63 हजार 833
2016 37 लाख 49 हजार 391
2017 25 लाख 99 हजार 190
2018 30 लाख 18 हजार 197
हिमाचल में 11 साल बाद सेब की सबसे कम फसल
हिमाचल में 11 साल बाद सेब की सबसे कम फसल हुई है। शिमला, कुल्लू, मंडी, सिरमौर, सोलन आदि जिलों के सेब उत्पादकों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता इसका कारण है। इससे बागवानों की वित्तीय स्थिति भी बिगड़ी। आंकड़ों के अनुसार इस बार 1.80 करोड़ सेब पेटी ही निकली, जबकि अमूमन करीब 2.50 करोड़ पेटी की पैदावार होती है।