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हिमाचल के लिए वित्त आयोग ने खोला राहत का पिटारा

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आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल के लिए 14वें वित्त आयोग ने पिटारा खोल दिया है। अगले पांच साल के लिए वित्त आयोग ने प्रदेश को 75,287 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि मिलने से प्रदेश के कर्मचारियों, पेंशनरों और आम आदमी को लाभ होगा।
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पंचायतों और स्थानीय निकायों के लिए 1790.24 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे। आपदा प्रबंधन को 1304 करोड़ दिए जाएंगे। टैक्स तथा राजस्व घाटे की भरपाई के लिए 69,849 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

13 वें वित्त आयोग के मुकाबले इस बार इसमें करीब तीन गुना बढ़ोतरी की गई है। 13वें आयोग ने पांच साल के लिए प्रदेश को 21,630 करोड़ दिए थे। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें अप्रैल, 2015 से लागू होंगी।
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ये होंगे फायदे

आधारभूत ढांचे का विकास
कर्मचारियों-पेंशनरों को मिलेंगी सुविधाएं
निकायों और पंचायतों को होगा विकास
प्रदेश सरकार को कर्ज से मिलेगी मुक्ति

किस मद में कितनी मिलेगी राशि
मद===================रकम (करोड़ में)
टैक्स एवं राजस्व घाटा========69,849.00
पंचायत एवं स्थानीय निकाय====1790.24
आपदा प्रबंधन के लिए========1304.00
सहायता अनुदान के तौर पर====2240.00
न्यायपालिका के लिए=========98.04
•टैक्स और राजस्व घाटे के लिए 69 हजार करोड़, पंचायतों, स्थानीय निकायों 1800 करोड़ व आपदा प्रबंधन को 1300 करोड़
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सरकार के प्रयासों का नतीजाः वीरभद्र सिंह

सीएम वीरभद्र सिंह का कहना है कि हिमाचल सरकार ने वित्त आयोग के सामने प्रदेश के खर्चे, आवश्यकताओं, देनदारियों, सीमित संसाधनों के बारे में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा था। इसी का नतीजा है कि 14वें वित्त आयोग ने प्रदेश के लिए अधिक बजट का प्रावधान किया गया।

वहीं, प्रधान सचिव वित्त एवं योजना श्रीकांत बाल्दी का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से जो मांगें रखी गईं थीं, उन्हें मान लिया गया है। पंजाब के मुकाबले हिमाचल को अधिक सहायता मिली है। आम बजट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि प्रदेश के लिए कितना लाभदायक होगा।

14वें वित्त आयोग ने देश के केवल 11 राज्यों को ही राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए सहायता अनुदान दिया है। इसमें हिमाचल प्रदेश दूसरे नंबर पर है। हिमाचल को 40625 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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