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अब धर्मशाला लौटना चाह रहे हैं बौद्ध धर्मगुरु करमापा दोरजे

Fri, 04 Jan 2019 11:37 AM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
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बौद्ध धर्मगुरु करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के अमेरिका के डोमिनिकन रिपब्लिक देश की नागरिकता लेने के चलते भारत सरकार के कथित रूप से खफा होने की बातों पर धर्मशाला स्थित उनके दफ्तर ने विराम लगाने की कोशिश की है। भारत में करमापा के दफ्तर के प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले मैनेजर सोनम ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि करमापा को भारत की मिट्टी से प्यार है।

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वे धर्मशाला आना चाहते हैं। भारत आने के लिए उन्होंने ऑनलाइन वीजा के लिए आवेदन भी किया है। वर्तमान में करमापा यूरोप में हैं। वीजा आवेदन के लिए उन्हें खुद अमेरिका जाना पड़ेगा। जब वे अमेरिका जाएंगे तो वीजा आवेदन के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी लाभ लेने के लिए वह पिछले वर्ष अमेरिका गए थे। उग्येन त्रिनले दोरजे जनवरी 2000 में भारत आए थे। दोरजे को बैजनाथ मठ के प्रमुख ताई सितु रिपोंछे और दलाईलामा ने 17वें करमापा की मान्यता दी थी।

इन्हें चीन सरकार ने भी मान्यता दे रखी है। उन्हें ग्यूतो मठ धर्मशाला से बाहर कहीं भी जाने के लिए भारत सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, जबकि दलाईलामा बाहर कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र थे। इसी बीच मनी लांड्रिंग के केस में करमापा परेशान हुए। इस केस में उन्हें कोर्ट ने राहत दी। भारत सरकार ने करमापा पर यात्रा संबंधी लगाए कुछ प्रतिबंध हटा लिए थे। सूत्रों के अनुसार करमापा इन सभी घटनाक्रमों से खफा थे। मई 2017 में स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देकर करमापा विदेश चले गए थे।
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 कहीं दलाईलामा के उत्तराधिकारी बनने की कवायद तो नहीं
तिब्बती बौद्ध धर्म में 900 साल पुराने करमा काग्यू संप्रदाय के 17वें करमापा के दो अलग-अलग दावेदारों उग्येन त्रिनले दोरजे (33) और त्रिनले थाई दोरजे (35) ने कुछ दिन पहले फ्रांस में मुलाकात कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। अब यू-ट्यूब पर एक चैनल का करमापा त्रिनले दोरजे पर बनाया वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें करमापा को दलाईलामा के बाद सबसे बड़ा तिब्बती धर्मगुरु बताया जा रहा है।

करमापा के अस्थायी घर के बाहर की सुरक्षा घटाई
पिछले डेढ़ वर्ष से 17वें करमापा के भारत न आने के चलते हिमाचल पुलिस ने भी उनके धर्मशाला स्थित अस्थायी घर के बाहर से आधी सुरक्षा घटा दी है। यहां आठ पुलिस कर्मी तैनात थे। इनमें से अब 4 को ड्यूटी से हटा लिया है। इसकी पुष्टि एसएसपी संतोष पटियाल ने की है।

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