आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में जल्द ही डीएसए मशीन स्थापित कर दी जाएगी। इस मशीन का सबसे ज्यादा फायदा हृदय और न्यूरो के रोगियों को होगा। मशीन से डिजिटल सबट्रेक्शन एंजियोग्राफी की मदद से हार्ट से संबंधित मरीजाें की बीमारी का सही पता लगाया जा सकता है। इससे मरीज के इलाज में आसानी रहती है। अब तक यह मशीन सिर्फ पीजीआई में है।
सरकार ने मशीन लगाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये दिए हैं। शेष आठ करोड़ का इंतजाम आईजीएमसी प्रबंधन ने खुद किया है। नौ करोड़ से खरीदी इस मशीन को लगाने की लेकर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब मशीन को चलाने को लेकर स्टाफ की तैनाती की जानी है। लेकिन स्टाफ की कमी के चलते इस मशीन को चलाना अस्पताल प्रबंधन के लिए टेढ़ी खीर भी साबित हो सकता है।
आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में इस मशीन को लगाया जाना है। मशीन की मदद से रक्त प्रवाह में आ रही दिक्कतों का स्टीक पता लगाया जा सकता है। इससे मस्तिष्क की छोटी सी छोटी नसों के अवरुद्ध होने का पता लगाकर उनकी ब्लाकेज तक खोली जा सकी है। इस मशीन की आधुनिक तकनीक के चलते प्रदेश के लाखों मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
रेडियोलॉजी विभाग में लगेगी यह मशीन
आईजीएमसी के रेडियोलॉजी विभाग में यह मशीन लगाई जानी है। मशीन के लगने के बाद रुटीन इंवेस्टिगेशन बढ़ेंगी। विभाग में तैनात स्टाफ ही यह कार्य करेंगे। प्रदेशभर के मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
- डॉ. रविचंद शर्मा - कॉलेज प्राचार्य, आईजीएमसी
मशीन को लेकर दो विभागों में ठनी
अस्पताल के लिए खरीदकर लाई इस मशीन को लेकर दो विभागों में ठन गई है। कार्डियोलॉजी विभाग का तर्क है कि जब इस मशीन से 90 फीसदी कार्य कार्डियोलॉजी विभाग के होने हैं तो फिर इसे रेडियोलॉजी विभाग में क्यों लगाया जा रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस मशीन के जरिये किस किस विभाग के मरीजों को लाभ मिलेगा। लेकिन हृदय और न्यूरो के रोगियों लिए इसका फायदा मिलना तय है।