लंबे समय से पंजाब और हिमाचल के बीच बैहल क्षेत्र की चिकनी खड्ड में चल रहे पुल निर्माण का विवाद मंगलवार देरशाम को सुलझ गया। बिलासपुर जिले के स्वारघाट उपमंडल और पंजाब सरकार की ओर से गठित राजस्व विभाग के अधिकारियों की टीम ने दोबारा विवादित स्थल का सीमांकन कराया। इसमें भूमि का पूरा रकबा हिमाचल सीमा में पाया गया। दोनों तरफ के अधिकारियों की सहमति से पुल निर्माण दोबारा शुरू करने के ठेके दार को निर्देश दिए गए।
चार माह बाद ठेकेदार ने भी निर्माण शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार आठ दिन पहले भी हिमाचल सरकार के राजस्व विभाग ने निशानदेही कराई थी। पंजाब का एक व्यक्ति निर्माणाधीन पुल की जगह को अपनी बता रहा था। गत सप्ताह भी निशानदेही में जमीन हिमाचल सरकार की पाई गई थी, लेकिन पंजाब की आपत्ति पर दोबारा उक्त स्थान पर हिमाचल और पंजाब सरकार के राजस्व महकमे के अधिकारियों ने लोक निर्माण विभाग उपमंडल स्वारघाट के अधिकारियों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में निशानदेही हुई।
उधर, लोक निर्माण विभाग उपमंडल स्वारघाट के कनिष्ठ अभियंता जगतराम ठाकुर ने बताया कि हिमाचल व पंजाब राज्य के राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में निशानदेही हुई है। दोबारा हुई निशानदेही में भी विवादित जमीन हिमाचल सरकार की पाई गई है। ठेकेदार ने पुल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। निशानदेही के दौरान हिमाचल सरकार के राजस्व विभाग की तरफ से तहसीलदार स्वारघाट, कानूनगो, हलका पटवारी, पीडब्ल्यूडी स्वारघाट के जेई, बैहल व कौड़ावाला पंचायतों के प्रधान मौजूद रहे।